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रविवार, नवंबर 30, 2014

ग़ाफ़िल की सुह्बतों का असर भी तो कम नहीं

रुख़ यूँ सँवारने का हुनर भी तो कम नहीं।
आरिज़ पे आँसुओं का गुहर भी तो कम नहीं।।

सैलाब और प्यास नमू एक ही जगह,
ऐसी ख़ुसूसियत-ए-नज़र भी तो कम नहीं।

एक क़त्आ-

रुस्वा न क्यूँ हो इश्क़ ज़माने में तू बता!
उल्फ़त में तेरी, जी का ज़रर भी तो कम नहीं।
मरहूम मेरे इश्क़ की, मानिन्दे रूह यार!
आवारा घूमती सी ख़बर भी तो कम नहीं।।

मक़्ता सहित दो शे’र और-

शीशा-ए-दिल का शग़्ल अगर टूटना है तो
इक संगज़ार से ये शहर भी तो कम नहीं।

नश्तर चला है दिल को मगर क्या हुई ख़बर
ग़ाफ़िल की सुह्बतों का असर भी तो कम नहीं।।

(आरिज़=गाल, गुहर=गौहर यानी मोती का बहुवचन, ख़ुसूसियत-ए-नज़र=नज़र की ख़ासियत, ज़रर=नुक़सान, संगज़ार=पत्थरों का बाग़ अर्थात पत्थरों से अटी जगह)

-‘ग़ाफ़िल’

12 टिप्‍पणियां:

  1. सैलाब और तश्नगी इक साथ देखिए,
    ऐसी ख़ुसूसियत-ए-नज़र कम तो नहीं है

    kam se kam shabdon me badi baat kahne ka hunar koi aapse sikhe. ham to bas itna kah sake hai "wah wah" bahut hi badhiya rachna.

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  2. शुक्रिया हरीश जी! आपको मेरा अन्दाजे-बयाँ पसन्द आया। यक़ीन है मेरी दूसरी रचनाओं पर भी जल्द ही आपकी नज़रे-इनायत होगी और आपके अनमोल कमेंट से महरूम नहीं रहेंगी।
    -ग़ाफ़िल

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  3. शीशा-ए-दिल का टूटना आदत सी है,
    वर्ना इक संगज़ार से ये शहर कम तो नहीं है।

    सच में?

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  4. बहुत उन्दा अशहार |अच्छी रचना |
    आशा

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  5. शीशा-ए-दिल का टूटना आदत सी है, वर्ना
    इक संगज़ार से ये शहर कम तो नहीं है।

    बहुत खूब गज़ल है जनाब !!!!

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  6. तुम कह रहे तो लब को सिए जा रहे हैं हम,
    पर इश्क़ में ये जी का ज़रर कम तो नहीं है।
    बहुत खूब लिखते हैं गाफिल साहब, बढिया गज़ल ।

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  7. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 05-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...

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  8. शुभ प्रभात
    प्यारी ग़ज़ल
    पसंद आई
    सादर

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