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शुक्रवार, अगस्त 26, 2011

एक ग़ाफ़िल भी पायमाल हुआ

जो बरतर था वो फटा हाल हुआ।
जो बदतर था वो बे-मिसाल हुआ॥

सिफ़र जबाब मिला हर सू से,
मेरी उल्फ़त का जो सवाल हुआ।

अन्दलीबों तेरा चहकना भी
रास आया ना, फिर बवाल हुआ।

नुमाइश आबरू की हर जानिब,
ये नज़ारा भी क्या कमाल हुआ।

हश्र दीवानगी का देखो तो,
एक ग़ाफ़िल भी पायमाल हुआ।

(सू=तरफ़, सिफ़र=शून्य, अन्दलीब=बुलबुल, ज़ानिब=तरफ़, हश्र=बुरा परिणाम,पायमाल=असमर्थ)
                                                    -ग़ाफ़िल

21 टिप्‍पणियां:

  1. अन्दलीबों तेरा चहकना भी
    रास आया ना, फिर बवाल हुआ।...

    bahut sundar andaaz.

    .

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  2. बहुत उम्दा।
    आपकी ग़ज़ल बहुत अच्छी लगती हैं मुझको।
    दोहे तो पलक झपकते रच देता हूँ।
    काश ग़ज़ल भी लिखने में माहिर होता।

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  3. बहुत खूब अन्ना गाफ़िल साहब क्या कहने हैं आपके उम्दा हैं अशआर आपके ,
    नुमाइश आबरू की हर जानिब,
    ये नज़ारा भी क्या कमाल हुआ।. बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारक .कृपया मुश्किल शब्दों के मानी लिखदें . Friday, August 26, 2011
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    "बद अच्छा ,बदनाम ,बुरा
    बिन पैसे ,इंसान बुरा ,
    काम सभी का ,एक ही है ,पर मनमोहन का नाम बुरा .------"-प्रधान मंत्री जी कह रहें हैं मैंने ४१ बरस इस देश की सेवा की है .इनमें से २० बरस मैंने संसद में बिताये हैं .अपनी पूरी योग्यता से मैंने देश की सेवा की है .मुझ पर आज लोग ऊंगली उठा रहें हैं .नेता विपक्ष मेरी और मेरे परिवारियों की इस दरमियान जुटाई गई संपत्ति की जांच कर सकतें हैं .
    मान्यवर हमारे बुजुर्ग कह गएँ हैं -"बद अच्छा बदनाम बुरा ".आपकी उठ बैठ ,सोहबत खराब है ,स्विस बेन्कियों की आप जी हुजूरी कर रहें हैं और स्विस कोष की हिफाज़त .आपकी निष्ठा "मम्मीजी "के साथ है .उस मंद मति बालक के साथ है ,जो इस अकूत संपत्ति का उत्तराधिकारी है .आप कहतें हैं मेरा कुसूर क्या है ?आप इसी बालक के लिए "हॉट सीट "का अनुरक्षण कर रहें हैं .
    ram ram bhai

    शुक्रवार, २६ अगस्त २०११
    राहुल ने फिर एक सच बोला .
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  4. सुंदर अभिव्यक्ति. अच्छी लगी

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  5. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल। बधाई।बहुत खूबसूरत ग़ज़ल। बधाई।

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. नुमाइश आबरू की हर जानिब,
    ये नज़ारा भी क्या कमाल हुआ।

    बहुत खूब..
    कुछ शब्दों के मायने अगर मिल जाते....तो और मज़ा आ जाता...

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  8. अन्दलीबों तेरा चहकना भी
    रास आया ना, फिर बवाल हुआ।

    बहुत खूब.

    उत्तर देंहटाएं
  9. अन्दलीबों तेरा चहकना भी
    रास आया ना, फिर बवाल हुआ।

    बहुत सुंदर ग़ज़ल।
    गाफिल साहब, मुबारकबाद कबूल फरमाएं।

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  10. भाई साहब कृपया मुश्किल शब्दों के मायने लिखिए ,आपने अभी भी नहीं लिखे ,हम फिर आयेंगें ,ब्लोगिया दस्तक के लिए आपका आभार . .... http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    Saturday, August 27, 2011

    अन्ना हजारे ने समय को शीर्षासन करवा दिया है ,समय परास्त हुआ जन मन अन्ना विजयी .

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  11. बीरू भाई जी आपके आदेश का पालन कर दिया गया है। जो कठिन शब्द थे मेरे हिसाब से मैंने उनका अर्थ लिख दिया है

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