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गुरुवार, सितंबर 15, 2011

जज्बात भी रूमानी है


मदभरी रात है जज्बात भी रूमानी है।
सामने छत पे मचलती हुई जवानी है॥


जिस्म बलखाए तो नागन को शरम आ जाये,
लट जो लहराये तो काली घटा सी छा जाये,
आँख में नाचती जैसे शराब की मस्ती,
किसी की याद में खोई वो रातरानी है॥


मन के आँगन में खुली फिर से नई मधुशाला,
ख़ुम* का इतराव नया, फिर से नई मधुबाला,
दौर चलता रहे और साकी तेरा साथ रहे,
आज पूरी भी हो जो चाह इक पुरानी है॥


ऐ बहारों मेरे जज्बात पे तरस खावो,
ऐ नज़ारों मेरे हालात पे तरस खावो,
इस भरे जाम में साकी की नज़र खँजर सी,
मेरे ही साथ ये अक्सर हुई कहानी है॥


बहक रहे हैं क़दम हर अदा बहक सी रही,
बहक रही है जुबाँ हर सदा बहक सी रही,
तू भी ग़ाफ़िल बहक के होश न आए फिर से,
मौक़ा-ए-जश्न है और जश्न-ए-जवानी है॥


* खुम=वह बड़ा घड़ा जिसमें शराब स्टोर होती है। उसी में से सुराही में निकाल कर फिर पैमानो में ढाल कर पेश की जाती है।
                                                                                -ग़ाफ़िल

43 टिप्‍पणियां:

  1. देखी रचना ताज़ी ताज़ी --
    भूल गया मैं कविताबाजी |

    चर्चा मंच बढाए हिम्मत-- -
    और जिता दे हारी बाजी |

    लेखक-कवि पाठक आलोचक
    आ जाओ अब राजी-राजी |

    क्षमा करें टिपियायें आकर
    छोड़-छाड़ अपनी नाराजी ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. गाफिल साहब
    अच्छा गीत है..... भाव भी बेहद नाज़ुक और प्रस्तुति भी असरदार है....

    बहक रहे हैं क़दम हर अदा बहक सी रही,
    बहक रही है जुबाँ हर सदा बहक सी रही,
    तू भी ग़ाफ़िल बहक के होश न आए फिर से,
    मौक़ा-ए-जश्न है और जश्न-ए-जवानी है॥
    वाह वाह !!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने तो सबो को जवान बना दिया जय हो //

    उत्तर देंहटाएं
  4. जिस्म बलखाए तो नागन को शरम आ जाये,
    लट जो लहराये तो काली घटा सी छा जाये,
    आँख में नाचती जैसे शराब की मस्ती,
    किसी की याद में खोई वो रातरानी है॥
    waah

    उत्तर देंहटाएं
  5. रूमानियत से भरा हुआ सुन्दर गीत रचा है आपने गाफिल साहिब!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहक रहे हैं क़दम हर अदा बहक सी रही,
    बहक रही है जुबाँ हर सदा बहक सी रही,
    तू भी ग़ाफ़िल बहक के होश न आए फिर से,
    मौक़ा-ए-जश्न है और जश्न-ए-जवानी है॥
    बहुत ही बहकती हुई ,रूमानियत में डूबी अनोखी रचना /बहुत बधाई आपको /मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया /आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /

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  7. अद्भुत क्षमता है। आपके लेखन से नए नए शब्द भी सीखने को मिल रहे हैं। इस रचना में जो रवानगी है उस पर मन लट्टू को गया।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ऐ बहारों मेरे जज्बात पे तरस खावो,
    ऐ नज़ारों मेरे हालात पे तरस खावो,
    इस भरे जाम में साकी की नज़र खँजर सी,
    मेरे ही साथ ये अक्सर हुई कहानी है॥

    बहारें सुनती कहाँ हैं हमारी आपकी मिन्नतें....

    .

    उत्तर देंहटाएं
  9. मन के आँगन में खुली फिर से नई मधुशाला,
    ख़ुम* का इतराव नया, फिर से नई मधुबाला,
    दौर चलता रहे और साकी तेरा साथ रहे,
    आज पूरी भी हो जो चाह इक पुरानी है॥
    अश आर तेरे सब के सब जाफरानी हैं ,तू सच मुच रात की रानी है .

    उत्तर देंहटाएं
  10. ऐ बहारों मेरे जज्बात पे तरस खावो,
    ऐ नज़ारों मेरे हालात पे तरस खावो,
    इस भरे जाम में साकी की नज़र खँजर सी,
    मेरे ही साथ ये अक्सर हुई कहानी है॥
    बहुत खूबसूरत शेर |
    बहुत सुन्दर रचना |

    उत्तर देंहटाएं
  11. इस भरे जाम में साकी की नज़र खँजर सी,
    मेरे ही साथ ये अक्सर हुई कहानी है॥

    जब बेहतरीन मंजर होंगे
    औ' निगाहों में खंजर होंगे.
    इस कदर होगी बारिशें
    पुराने खेत क्यूं बंजर होंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  12. शनिवार १७-९-११ को आपकी पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया पधार कर अपने सुविचार ज़रूर दें ...!!आभार.

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  13. किसी और की याद में खोयी रातरानी को यूं घूरना .............................
    पर कविता सुंदर है बहुत ।

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  14. 'घूरना' नहीं आशा जी 'निहारना'... सौन्दर्य यदि निहारा न जाय तो उसका अस्तित्व बेजा ही होगा...हौसला आफ़जाई के लिए आपका आभार

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  15. जब बेहतरीन मंजर होंगे
    औ‘ निगाहों में खंजर होंगे
    इस कदर होगी बारिशें
    पुराने खेत क्यूं बंजर होंगे

    कइयों को लग रहा होगा कि ऐसा तो उसके साथ भी हुआ था।

    उत्तर देंहटाएं
  16. जब बेहतरीन मंजर होंगे
    औ‘ निगाहों में खंजर होंगे
    इस कदर होगी बारिशें
    पुराने खेत क्यूं बंजर होंगे
    क्या बात है, बहुत खूब, इससे ज्यादा कुछ कहने के लायक हम नहीं हैं|

    उत्तर देंहटाएं
  17. हसरत और रोमांच ,रूहानी दास्ताँ सी आपकी ग़ज़ल सीधा वार करती है .बधाई और ब्लोगिया दस्तक के लिए आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  18. मन के आँगन में खुली फिर से नई मधुशाला,
    ख़ुम* का इतराव नया, फिर से नई मधुबाला,
    दौर चलता रहे और साकी तेरा साथ रहे,
    आज पूरी भी हो जो चाह इक पुरानी है॥
    बहुत ही खुबसूरत रचना आपका बहुत -बहुत धन्यवाद् |

    उत्तर देंहटाएं
  19. वाह बहुत खूब रूमानियत लिए हुए शानदार गजल /बधाई आपको /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली (९) के मंच पर पर पधारें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/आप हमेशा अच्छी अच्छी रचनाएँ लिखतें रहें यही कामना है /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर सादर आमंत्रित हैं /

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  20. बहुत सुन्दर, मनमोहक ,दिल तक पहुँचने वाली रचना

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  21. आपकी ग़ज़ल तो सूखे पेड़ में भी मंजरी लाने वाली है.

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  22. बहुत रूमानी प्रस्तुति... रचना के भाव पूरी तरह सराबोर कर देते हैं। बहुत सुंदर ।

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  23. ऐ बहारों मेरे जज्बात पे तरस खावो,
    ऐ नज़ारों मेरे हालात पे तरस खावो,
    इस भरे जाम में साकी की नज़र खँजर सी,
    मेरे ही साथ ये अक्सर हुई कहानी है॥
    वाह क्या प्रस्तुति है .....!!!! बहुत ही बढ़िया तेवर....!

    उत्तर देंहटाएं
  24. मन के आँगन में खुली फिर से नई मधुशाला,
    ख़ुम* का इतराव नया, फिर से नई मधुबाला,
    दौर चलता रहे और साकी तेरा साथ रहे,
    आज पूरी भी हो जो चाह इक पुरानी है॥

    उत्तर देंहटाएं
  25. भाई साहब !बहुत अच्छे अलफ़ाज़ ,अश -आर लिए आतें हैं आप ,हौसला रोज़ बा रोज़ बधातें हैं आप .खुदा सलामत रहें आप .

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  26. सुन्दर और भावपूर्ण रचना. बधाई.

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  27. वाह वाह ! यह प्रस्तुति तो ग़ज़ब ढ़ा रही है :)


    मदभरी रात है जज्बात भी रूमानी है।
    सामने छत पे मचलती हुई जवानी है॥

    आपकी रूमानियत और सामने वाली छत पर मचलती जवानी सलामत रहे … यह दुआ है !!



    ♥ बधाई और शुभकामनाएं !♥
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  28. मदभरी रात है जज्बात भी रूमानी है।
    सामने छत पे मचलती हुई जवानी है॥

    बहुत ही हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति । धन्यवाद ।

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  29. वाह जी!! क्या बात है ...शायर और उसकी लेखनी कभी बूढ़े नही होते ....सुंदर आसार ..बधाई

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  30. कलम देखिये कैसे चहक रहीं है
    वहाँ पर जहाँ हर चीज बहक रही है !

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  31. दुबारा पढ़कर फिर वही काव्यानंद से रू-ब-रू हुआ।

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  32. वाह सर क्या बात है बेहतरीन रचना

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  33. बहुत खूब सुन्दर और भावपूर्ण रचना!

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