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बुधवार, अक्तूबर 12, 2011

आयी न क्या हुआ है

मेरे पास वो अदा से आयी न क्या हुआ है?
मेरी बोल उसके मन को भायी न क्या हुआ है?

कितनी ही तमन्ना से इक गीत मैं रचा था,
वह गीत अब तलक वो गायी न क्या हुआ है?

ये हुस्न वाले सारे क़स्में हैं सारी खाते,
वो एक भी क़सम तो खायी न क्या हुआ है?

'तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?

गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?

-‘ग़ाफ़िल’

61 टिप्‍पणियां:

  1. आईना पूँछता था आई ना क्या हुआ है?

    बढ़िया प्रस्तुति |
    हमारी बधाई स्वीकारें ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. कितनी ही तमन्ना से इक गीत मैं रचा था,
    वह गीत अब तलक वो गाई न क्या हुआ है?
    wakai amanat hai

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये हुस्न वाले सारे क़स्में हैं सारी खाते,
    वो एक भी क़सम तो खाई न क्या हुआ है?
    shandaar prastuti..sadar badhayee

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    आईना पूँछता था आई ना क्या हुआ है?
    क्या बात है !बहुत खूब आइना पूछता है ,आई न क्या हुआ है .वाह सुन्दर शब्द योजना उर्दू का असल जादू .

    उत्तर देंहटाएं
  5. तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?

    गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?

    वाह गाफिल साहब बहुत खूब ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. हम तुमसे दिल की बातें न कह पाये
    तुमने एक पराया आंगन ढूँढ़ लिया.

    बात लब पे न लाने का एक नतीजा ऐसा भी हो सकता है .क्या खयाल है ?

    उत्तर देंहटाएं
  7. तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?

    bahut khoobsoorat.....

    jawaan dilon ki dhakan...

    उत्तर देंहटाएं
  8. कुछ डिफ़्रेंट पेश किया है आपने इस बार
    बधाई


    गुजर गया एक साल

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  9. सुंदर ग़ज़ल के खूबसूरत शे‘र।

    उत्तर देंहटाएं
  10. 'तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?
    bhut acha.

    उत्तर देंहटाएं
  11. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?

    ....बहुत ख़ूबसूरत गज़ल ....

    उत्तर देंहटाएं
  12. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?
    bahut sundar gazal

    उत्तर देंहटाएं
  13. तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?
    बहुत ही बढि़या ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत बढ़िया लिखा है...उम्दा

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही बढ़िया गजल..!
    आपका आभार...!
    कभी वक्त की जंजीरों से आज़ादी मिले तो मेरे ब्लॉग पे भी आए
    >>>दीपावली की शुभकामनाये<<<

    उत्तर देंहटाएं
  16. हैं इश्क़ में पहले भी ठोकर खा चुके कई
    मन मानता नहीं है,बस ये हुआ है!

    उत्तर देंहटाएं
  17. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  18. सुंदर भावाभिव्‍यक्ति.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  19. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?
    दिवाली मुबारक

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत ख़ूबसूरत गज़ल .......
    दिवाली मुबारक !

    उत्तर देंहटाएं
  21. sundar Gazal..Umda... Aapko Deepawali par shubhkaamnayen..meri post ko charchamanch me sthaan dene ke liye aaabhaar

    उत्तर देंहटाएं
  22. सुन्दर प्रस्तुति
    आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  23. दीपावली के पावन पर्व पर आपको मित्रों, परिजनों सहित हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ!

    way4host
    RajputsParinay

    उत्तर देंहटाएं
  24. प्यार हर दिल में पला करता है,
    स्नेह गीतों में ढ़ला करता है,
    रोशनी दुनिया को देने के लिए,
    दीप हर रंग में जला करता है।
    प्रकाशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!!

    उत्तर देंहटाएं
  25. क्या बात है. दीपोत्सव की शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत अच्छी भावाभिव्यक्ति सुन्दर रचना
    आपको दीपावली एवं नववर्ष की सपरिवार ढेरों शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  27. मेरे पास वो अदा से आयी न क्या हुआ है?
    मेरी बोल उसके मन को भायी न क्या हुआ है?
    खूब सूरत .ब्लॉग पर पधारने तथा चर्चा मंच पर हमें फैलाने के लिए आपका आभार ,शुक्रिया तहे दिल से .

    उत्तर देंहटाएं
  28. खूबसूरत गज़ल ... इंतज़ार कीजिये आ ही जायेंगी ..

    उत्तर देंहटाएं
  29. आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेर नए पोस्ट "अपनी पीढ़ी को शब्द देना मामूली बात नही है " पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  30. वो एक कसम खाई भी ना , क्या हुआ है ...
    बेहतरीन ग़ज़ल !

    उत्तर देंहटाएं
  31. 'तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?

    गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?
    .....बहुत खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  32. ये हुस्न वाले सारे क़स्में हैं सारी खाते,
    वो एक भी क़सम तो खायी न क्या हुआ है?

    बहुत सुन्दर रचना!
    वाह वाह !

    उत्तर देंहटाएं
  33. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?

    वाह! गाफिल साहब, बहुत खूब ग़ज़ल कही है

    उत्तर देंहटाएं
  34. तेरे पास-पास रहना मेरी ज़िन्दगी का मक़सद',
    यह बात वो भी लब पे लायी न क्या हुआ है?...

    bahut hi gajab ki gajal kahi hai sir aapn...

    aaj se dosti pakki...
    jai hind jai bharat

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  35. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?

    बहुत सुंदर भाव । धन्यवाद । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

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  36. गुज़रा है जब भी 'ग़ाफ़िल' शीशे के सामने से,
    पूछा है आइना, वो आयी न क्या हुआ है?
    बहुत सुंदर ग़ज़ल .

    उत्तर देंहटाएं