फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

मेरी फ़ोटो

मेरे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

सोमवार, दिसंबर 05, 2011

शब है तारीक अभी

शब है तारीक अभी, माहताब भी होगा।
मेरी इस बज़्म का आख़िर शबाब भी होगा।।

चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
एक झोंके मे ही वह बेनक़ाब भी होगा।

तू यार! ख़ुश रहे, भले मेरे रक़ीब के साथ,
मगर ख़्याल रहे के अज़ाब भी होगा।

हुए तबाह तेरे नेक इरादों के सबब,
नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।

जो गिनता रहता है ग़ाफ़िल की हमेशा ग़फ़लत,
ग़फ़लतों का तेरी मौला! हिसाब भी होगा।।

-‘ग़ाफ़िल’

58 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी वाह,.....क्या कहने
    बेहतरीन गजल,...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया अश्आरों से सजी खूबसूरत ग़ज़ल पढ़वाने के लिे शुक्रिया।

    उत्तर देंहटाएं
  3. नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।
    बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  4. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    terahsatrah.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर गजल

    शब है तारीक अभी, माहताब भी होगा।
    इस मेरी बज़्म का आख़िर शबाब भी होगा।।

    वाह जी क्या कहने

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेहद अच्छी रचना रही .शब्दार्थ देकर आपने इसे और भी ऊंची परवाज़ दिलवादी .आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  7. तू यार! ख़ुश रहे, भले मेरे रक़ीब के साथ,
    मगर ख़याल रहे के अज़ाब भी होगा ...

    बहुत खूब गाफिल साहब ... कमाल का शेर है इस गज़ल का ... मज़ा आ गया ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बे-नक़ाब भी होगा।

    तू यार! ख़ुश रहे, भले मेरे रक़ीब के साथ,
    मगर ख़याल रहे के अज़ाब भी होगा।


    bhaut sundar gazl . mishra ji aapke pas to gazlon ka khajana hai .... hr bar kuchh jyada achhi gazl apke post pr milti hai ...bahut bahut abhar.

    उत्तर देंहटाएं
  9. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बे-नक़ाब भी होगा।

    तू यार! ख़ुश रहे, भले मेरे रक़ीब के साथ,
    मगर ख़याल रहे के अज़ाब भी होगा।

    क्या बात है गाफिल साहब आज तो अलग ही है अंदाज़ । बढिया गज़ल ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बे-नक़ाब भी होगा।

    .....लाज़वाब...बहुत ख़ूबसूरत गज़ल..

    उत्तर देंहटाएं
  11. इन्कलाब व हिसाब दोनों का ध्यान रखा जायेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  12. क्या कहने!!!!बहुत खूब मन लुभावन सुंदर गजल,....
    मेरे नए पोस्ट पर इंतजार है,....

    उत्तर देंहटाएं
  13. क़यामत के दिन से अब कौन डरता है .तू यार! ख़ुश रहे, भले मेरे रक़ीब के साथ,
    मगर ख़याल रहे के अज़ाब भी होगा।
    ये दौर है क़यामत से क़यामत तक का .

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर...हर शेर हर शब्द उम्दा ...!
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  15. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बे-नक़ाब भी होगा।
    लाजवाब! दिन तो बदलेंगे ही .. बस धैर्य से काम लेना चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत ही सुन्दर है आपकी सभी लाइन गाफिल जी
    बहुत बहुत बधाई हो आपको

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत प्यारी गजल बेहतरीन पोस्ट,....
    मेरे पोस्ट "आज चली कुछ ऐसी बातें....में आपका इंतजार है

    उत्तर देंहटाएं
  18. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बे-नक़ाब भी होगा।
    खूबसूरत है शैर ओ शायरी आपकी ब्लॉग पे आके टिपियाने की मोहब्बत आपकी .शुक्रिया .

    उत्तर देंहटाएं
  19. इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  20. खूबसूरत शब्द संयोजन सुन्दर गज़ल |

    उत्तर देंहटाएं
  21. आपकी शानदार गज़ल ने कुछ नए शब्द भी सिखाए. शुक्रिया. बेहतरीन और उम्दा शेर.

    उत्तर देंहटाएं
  22. नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।
    बहुत खूब!शब्दार्थ देने के लिए आभार|

    उत्तर देंहटाएं
  23. दुबारा पढ़ी ---
    एक बढ़िया प्रस्तुति ---
    लगता है गाफिल अपने
    रंग में वापस आने लगे हैं ||

    बधाई भाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  24. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बेनक़ाब भी होगा।
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  25. गाफिल जी ,..बहुत सुंदर गजल,..लाजबाब

    मेरे नए पोस्ट में तसरीफ लायें...
    नेताओं की पूजा क्यों, क्या ये पूजा लायक है
    देश बेच रहे सरे आम, ये ऐसे खल नायक है,
    इनके करनी की भरनी, जनता को सहना होगा
    इनके खोदे हर गड्ढे को,जनता को भरना होगा,

    उत्तर देंहटाएं
  26. आपकी प्रस्तुति.बहुत ही खूबसूरत और प्रेरक है।

    उत्तर देंहटाएं
  27. हुए तबाह तेरे ग़लत इरादों के सबब,
    नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।
    वाह!
    खूबसूरत ग़ज़ल के सारे शेर काबिले दाद हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  28. आपका पोस्ट रोचक लगा । मेरे नए पोस्ट नकेनवाद पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  29. हुए तबाह तेरे ग़लत इरादों के सबब,
    नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।

    जो गिनता रहता है ग़ाफ़िल की हमेशा ग़फ़लत,
    ग़फ़लतों का तेरी मौला! हिसाब भी होगा।।
    क्या बात है गाफिल साहब, बेहद खूबसूरत गज़ल ।

    उत्तर देंहटाएं
  30. वाह! जनाब खूब कोसा है पानी पी पी कर।
    हट जा रकीब! वरना बिगड़ेगा तेरा नसीब।

    उत्तर देंहटाएं
  31. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी,
    एक झोंके मे ही वह बेनक़ाब भी होगा।
    .......बेहतरीन !

    उत्तर देंहटाएं
  32. हुए तबाह तेरे ग़लत इरादों के सबब,
    नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा

    khoobsurat sher...

    उत्तर देंहटाएं
  33. आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपकी प्रतिक्रियायों की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  34. इस शानदार काव्यमय प्रस्तुति के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  35. हुए तबाह तेरे ग़लत इरादों के सबब,
    नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा।bahut achchi prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  36. जो गिनता रहता है ग़ाफ़िल की हमेशा ग़फ़लत,
    ग़फ़लतों का तेरी मौला! हिसाब भी होगा।।
    सभी ब्लॉग कर्मियों को बड़ा दिन मुबारक .ईशामसीह का जन्म दिन मुबारक .नव वर्ष की पूर्व वेला मुबारक .
    वीरुभाई ,सी -४ ,अनुराधा ,नेवल ऑफिसर्स फेमिली रेज़िदेंशियल एरिया ,(नोफ्रा ),कोलाबा ,मुंबई -४००-००५ ./०९३५०९८६६८५ /०९६१९०२२९१४ आप ब्ब्लोग पर तशरीफ़ लाए शुक्रिया .

    उत्तर देंहटाएं
  37. हुए तबाह तेरे ग़लत इरादों के सबब,
    नहीं हैं दूर वो दिन इन्क़िलाब भी होगा
    सुन्दर प्रस्तुति
    v7: .इतने दिनों बाद........

    उत्तर देंहटाएं
  38. चाँद कब तक छिपेगा अब्र की पहरेदारी
    एक झोंके मे ही वह बेनक़ाब भी होगा
    BAHUT BAHUT KHOOB./

    उत्तर देंहटाएं
  39. वाह ! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल और मतला तो कमाल है!

    उत्तर देंहटाएं
  40. बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर गजल कमाल की पोस्ट ......
    welcome to new post--जिन्दगीं--

    उत्तर देंहटाएं
  41. सुंदर अभिव्यक्ति की बेहतरीन गजल ....
    welcom to new post --"काव्यान्जलि"--

    उत्तर देंहटाएं