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मंगलवार, अप्रैल 24, 2012

होश फाख़्ता यारों!

तोड़कर चलते बने, वह था बेख़ता यारों!
आईना फिर भी देखता है रास्ता यारों!!

दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!

जब भी पूछा के तेरी बेरुख़ी का क्या है सबब,
मेरी आवारग़़ी उसने दिया बता यारों।।

ग़ालिबन् तख़्लिया है आह नीमकश फिर भी,
मुश्क़िलें बेश्तर हैं, होश फ़ाख़्ता यारों!

नहीं ग़रज़ भी रही और भी है वक़्ते-फ़िराक़,
हो तो क्यूँ कर के हो ‘ग़ाफ़िल’ से वास्ता यारों?

-‘ग़ाफ़िल’


48 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति,..

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बुधवारीय चर्चा-मंच
    पर है |

    charchamanch.blogspot.com

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  3. वाह बहुत खूब




    एक अजनबी राह से पहुंची हूँ यहाँ तक ; लेकिन
    मुझको इस बज़्म से रूबरू ना होना आया ||...अनु

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  4. फेरकर चल दिये मुँह, था वो बेख़ता यारों!
    आईना अब भी देखता है रास्ता यारों!!
    क्या बात है गाफिल साहब मतला बेहद खूबसूरत है और आपकी ग़ज़लों की अपनी बयानी होती है .

    कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 22 अप्रैल 2012
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    डॉ. दाराल और शेखर जी के बीच का संवाद बड़ा ही रोचक बन पड़ा है, अतः मुझे यही उचित लगा कि इस संवाद श्रंखला को भाग --तीन के रूप में " ज्यों की त्यों धरी दीन्हीं चदरिया " वाले अंदाज़ में प्रस्तुत कर दू जिससे अन्य गुणी जन भी लाभान्वित हो सकेंगे |
    वीरेंद्र शर्मा

    ~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~(वीरुभाई

    )

    http://www.blogger.com/blogger.g?blogID=3256129195197204259#allposts


    कितनी थी हरजाई पूनो -
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  5. वाह! गाफिल जी
    बहुत ही खूबसूरत मतले से शुरुआत हुई इस शानदार गजल की

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  6. रब से बोला के इश्क़ में भी पशेमानी क्यूँ?
    बस एक लफ़्ज़ वो 'ग़ुरबत' दिया बता यारों।

    पूरी ग़ज़ल का हर शेर लाजबाब है ....बधाई के साथ ही आभार भी गाफिल जी |

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  7. बेहतरीन गज़ल है गाफिल जी ! हर लफ्ज़ सूरते हाल बयाँ करने में सक्षम है ! बहुत ही बढ़िया !

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  8. बड़ा मजा आ रहा है पढ़ने में ....

    नहीं ग़रज़ भी रही और भी है वक़्ते-फ़िराक़,
    हो तो क्यूँ कर के हो 'ग़ाफ़िल' से वास्ता यारों?

    ....आपने भी खूब कह दी गाफिल जी!....

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  9. ग़ालिबन्‌ तख़्लिया है आह नीम कश फिर भी,
    मुश्क़िलें बेशतर हैं, होश फाख़्ता यारों!
    बहुत खूब ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
    कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!
    अहाहा
    इस शे’र पर तो दिल अटक गया है दाफिल भाई।

    उत्तर देंहटाएं
  11. bahut sunder gazal. urdu k shabdo k arth batane k liye aabhar. ab tak takhliya ka arth to ham kuchh aur hi samjhte the...aaj pata chala.

    उत्तर देंहटाएं
  12. दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
    कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!
    ग़ालिबन्‌ तख़्लिया है आह नीम कश फिर भी,
    मुश्क़िलें बेशतर हैं, होश फाख़्ता यारों!

    उम्दा, खास , दिलकश
    बेहतरीन गज़ल, इन दो शेरों पर खासतौर से दाद कबूल करें.

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  13. वाह!!!क्या बात है ...बहुत खूब लिखा है आपने....

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत आला लिख दी यह ग़ज़ल गाफिल .द्रुत टिपण्णी के लिए ज़नाब का शुक्रिया .कृपया यहाँ भी पधारें -

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
    आरोग्य की खिड़की

    उत्तर देंहटाएं
  15. दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
    कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!

    ....बहुत खूब ! बेहतरीन गज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  16. लाजबाब गज़ल है गाफिल जी !

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  17. बहुत सुन्दर...लाजबाब गज़ल

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  18. kya khoob gazal kya khoob gazal


    दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
    कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!

    mubaraq ho janab !

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  19. वाह!!!! बहुत सुंदर प्रस्तुति,..बेहतरीन गजल,....

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

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  20. सुन्दर गजल बेहतरीन अल्फ़ाज |

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  21. behtarin chuninda shabd..lajabab es ghazal se bahut kuch seekhne ko mila..aap aisi hee ghazlein likhte rahein..hardik dhanywad...sadar badhayee ke sath

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  22. बहुत बहुत बढ़िया सर............

    लाजवाब गज़ल.

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  23. फेरकर चल दिये मुँह, था वो बेख़ता यारों!
    आईना अब भी देखता है रास्ता यारों!!

    लाजवाब ग़ज़ल।

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  24. Tuesday, April 24, 2012
    होश फाख़्ता यारों!
    फेरकर चल दिये मुँह, था वो बेख़ता यारों!
    आईना अब भी देखता है रास्ता यारों!!
    Tuesday, April 24, 2012
    होश फाख़्ता यारों!

    फेरकर चल दिये मुँह, था वो बेख़ता यारों!
    आईना अब भी देखता है रास्ता यारों!!

    बढ़िया PRASTUTI .NIRANTAR की GAI HAUSLAA AFZAAI KE लिए AAPKAA SHUKRIYAA .कृपया YAAHN BHI पधारें .

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/g-spot.html#comments


    महिलाओं में यौनानद शिखर की और ले जाने वाला G-spot मिला

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  25. रब से बोला के इश्क़ में भी पशेमानी क्यूँ?
    बस एक लफ़्ज़ वो 'ग़ुरबत' दिया बता यारों।
    ...बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  26. बेहतरीन प्रस्तुति ...बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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  27. बहुत खूब .... सुन्दर गज़ल

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  28. हैं खा चुके धोखा,कई एकदम तैयार
    कोई मानता नहीं है,क्यूं बता यारो!

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  29. दिल की मासूमियत देखो! जो टूट करके भी,
    कितनी शिद्दत से है पूछा तेरा पता यारों!

    रब से बोला के इश्क़ में भी पशेमानी क्यूँ?
    बस एक लफ़्ज़ वो 'ग़ुरबत' दिया बता यारों।


    बेहद शानदार लाजवाब गज़ल ....एक-एक अशआर मन को छूने वाले है...

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  30. नहीं ग़रज़ भी रही और भी है वक़्ते-फ़िराक़,
    हो तो क्यूँ कर के हो 'ग़ाफ़िल' से वास्ता यारों?

    ...आप जो कुछ कहतें है...सही कहतें है गाफिल जी!...मजा आ गया!

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  31. आप सभी क़द्रदानों का बहुत-बहुत शुक़्रिया

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