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मंगलवार, मार्च 19, 2013

आग में इस क़दर धुंआ क्या है?

कोई बतला दे के हुआ क्या है?
आग में इस क़दर धुंआ क्या है?

हुस्न वालों की वफ़ा के पीछे
एहतियातन छुपी जफ़ा क्या है?

ज़मीन-ओ-आसमाँ भी मिलते हैं,
आपमें मुझमें फ़ासला क्या है?

उसकी नज़रों की ही इनायत है
फिर दुआ और बद्दुआ क्या है?

न बोले आप अब वक़्ते-रुख़्सत
न पूछूँगा मेरी ख़ता क्या है?

मैं तो ग़ाफ़िल हूँ मगर आप नहीं,
यूँ अदावत का मुद्दआ क्या है?

कमेंट बाई फ़ेसबुक आई.डी.


13 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस पोस्ट का लिंक आज के चर्चा मंच पर भी है!
    सादर ...सूचनार्थ!
    http://charchamanch.blogspot.in/2013/03/1188.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह क्या बात! बहुत बेहतरीन! हर शेर लाजवाब!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह-
    बहुत बढ़िया आदरणीय-
    शुभकामनायें-

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 20/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर और बेहतरीन प्रस्तुति,आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  6. उसकी नज़रों का है करिश्मा सब
    फिर दुआ और बद्दुआ क्या है?
    KYA BAAT HAI ..
    BEHTAREEN...LAJABAB..

    उत्तर देंहटाएं
  7. ज़मीन-ओ-आसमाँ भी मिलते हैं,
    आपमें मुझमें फ़ासला क्या है?

    बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  8. अति उत्कृष्ट रचना है मानवीय सरोकारों से रु -ब -रु .

    हुस्न वालों की वफ़ा के पीछे
    एहतियातन छुपी जफ़ा क्या है?

    एक से बढ़के एक अशआर ,

    उसकी नज़रों की ही इनायत है
    फिर दुआ और बद्दुआ क्या है?

    मैं भी मुंह में जुबां रखता हूँ ,

    काश पूछो मुद्दा क्या है ?

    फाग मुबारक .

    उत्तर देंहटाएं
  9. हुस्न वालों की वफ़ा के पीछे
    एहतियातन छुपी जफ़ा क्या है?

    ज़मीन-ओ-आसमाँ भी मिलते हैं,
    आपमें मुझमें फ़ासला क्या है?

    hr sher lajbab .....khoob soorat prastuti ke liye badhai .

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेहतरीन ग़ज़ल...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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