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बुधवार, जनवरी 30, 2013

जो लिख दिया सो लिख दिया!

यह बात भी क्या बात है ‘जो लिख दिया सो लिख दिया’?
याँ क्या तेरी औक़ात है जो लिख दिया सो लिख दिया??

गेसू को लिख डाला घटा, चेहरे को चन्दा लिख दिया,
पर क्या ये सच्ची बात है जो लिख दिया सो लिख दिया?

याँ क़ुदरतन हालात में तब्दीलियाँ लाज़िम रहीं,
फिर क्यूँ अड़ाये लात है जो लिख दिया सो लिख दिया?

घर फूँककर ख़ुद का ही ख़ुद जो रोशनी पर है फ़िदा
देखा? के काली रात है जो लिख दिया सो लिख दिया?

यूँ तो कोई ग़ाफ़िल याँ सद्रे-कारवां दिखता नहीं,
शिव की यही बारात है? जो लिख दिया सो लिख दिया??

हाँ नहीं तो!

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मंगलवार, जनवरी 01, 2013

नववर्ष (2013) की मंगल कामना



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