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बुधवार, अप्रैल 17, 2013

एगो टैक्सी छाप गीत-

तोहरे नाक की नथुनिया हमरा जान मारे ली।
तोहरे माथ की चंदनिया हमरा जान मारेली।।

हमरा प्यार से बुलावन, तोहरा दूरि चलिजावन,
झूठै बतिया बनावन, ज़्यादा नख़रा देखावन,
तोहरी मीठी मुसकनिया हमरा जान मारेली,
तोहरी चंचल चितवनिया हमरा जान मारेली।

तनवा सरसेला ख़ूब, मनवा हरसेला ख़ूब,
रस बरसेला ख़ूब, लोगवा तरसेला ख़ूब,
तोहरी मधुरी बोलनिया हमरा जान मारेली,
तोहरी लटलटकनिया हमरा जान मारेली

संझवां छत पर घुमायी, फोन लइकै बतियायी,
ताहरा बाल झटकायी ग़ाफ़िल वइसै बौराई,
मैक्सी की फररर फरकनिया हमरा जान मारेली,
तोहरी चाल मस्तनिया हमरा जान मारेली।।

हाँ नहीं तो!

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रविवार, अप्रैल 14, 2013

केतना हमके सतइबू हमार सजनी!

चलिए टेस्ट बदलते हैं! प्रस्तुत है एक गीत-

केतना हमके सतइबू हमार सजनी!
कहवाँ हमसे लुकइबू हमार सजनी!!

जउन मन भावै ऊ कहि डारा बतिया,
नाहीं पछितइबू तू सारी-सारी रतिया,
चला जाबै हम होत भिनसार सजनी!
केतना हमका सतइबू हमार सजनी!!

कइकै बहाना तू बचि नाहीं पइबू,
पीछा नाहीं छोड़ब हम केतनौ छोड़इबू,
ताना मारौ चाहे हमका हजार सजनी!
केतना हमका सतइबू हमार सजनी!!

ग़ाफ़िल चलि जाई त फेरि नाहीं आई,
मानी नाहीं फिर ऊ कउनौ मनाई,
चाहे छूटि जाय पूरा घर-बार सजनी!
केतना हमका सतइबू हमार सजनी!!

हां नहीं तो!

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बुधवार, अप्रैल 10, 2013

अब तो आबे-हयात फीके से

हो चुके फ़ाकेहात फीके से।
आज के इख़्तिलात फीके से॥

हसीन मिस्ले-शहर मयख़ाने,
लगते अब घर, देहात फीके से।

साथ साक़ी का हाथ में प्याला,
यूँ तो हर एहतियात फीके से।

बस उसके ख़ाब में मेरा खोना
और हर मा’लूमात फीके से।

चख चुका अब शराबे-लब ग़ाफ़िल,
अब तो आबे-हयात फीके से॥

(फ़ाकेहात=ताज़े हरे मेवे जैसे सेब आदि, इख़्तिलात= चुम्बन आलिंगन आदि, आबे-हयात= अमृत)

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