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मंगलवार, जून 18, 2013

मैं तुझे आजमा के देख लिया

ख़ूब अपना बना के देख लिया
मैं तुझे आजमा के देख लिया
तुझको ख़ुश देखने की ख़्वाहिश में
मैंने ख़ुद को गंवा के देख लिया

बात करके मुझे बेज़ार न कर!
हो चुका ख़ूब अब लाचार न कर!
तेरी ख़ुदगर्ज़ियाँ छुपी न रहीं
बख़्श दे मुझको और प्यार न कर!

अब तो अपना जमाना चाहता हूँ
ख़ुद को अब आजमाना चाहता हूँ
तेरी ख़ुशियों से मैं क्यूँ ख़ुश होऊँ
ख़ुद की ख़ुशियों में जाना चाहता हूँ।।

मंगलवार, जून 11, 2013

कोई मुझे रुला गया

किसी की जान जा रही, किसी को लुत्फ़ आ गया।
कोई सिसक सिसक रहा, कोई है गीत गा गया॥

कोई मज़ार दीपकों की रोशनी में खिल रही,
किसी की ज़िन्दगी को अन्धकार थपथपा गया।

किसी की मांग धुल रही, किसी की सेज सज गयी,
कोई यहाँ से जा रहा, कोई यहाँ पे आ गया।

यहीं पे जीत हार है, यहीं पे द्वेष प्यार है,
कोई किसी को भा गया, कोई किसी को भा गया।

और यह जहाँ भी क्या अज़ीब रंगतों का है जहाँ,
कोई मुझे हंसा रहा, कोई मुझे रुला गया॥

कमेंट बाई फ़ेसबुक आई.डी.