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शुक्रवार, नवंबर 07, 2014

हमने देखा है

तेरी जुल्फ़ों में बियाबान हमने देखा है
उसमें उलझा हुआ इंसान हमने देखा है
हमने देखा है सबा कैसे आग भड़काई
और जला किस तरह अरमान हमने देखा है

-‘ग़ाफ़िल’

(चित्र गूगल से साभार)

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (08-11-2014) को "आम की खेती बबूल से" (चर्चा मंच-1791) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. हमने देखा है
    तेरी जुल्फ़ों में बियाबान हमने देखा है
    उसमें उलझा हुआ इंसान हमने देखा है
    हमने देखा है सबा कैसे आग भड़काई
    और जला किस तरह अरमान हमने देखा है

    -‘ग़ाफ़िल’

    उत्तर देंहटाएं
  3. ‘ग़ाफ़िल’सुन्दर प्रस्तुति ग़ाफ़िल साहब की हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे कहते हैं कि।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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