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गुरुवार, मई 29, 2014

धोई-धाई सी मक्कारी

ये दुनियाबी बातें लिखना
दिन को लिखना रातें लिखना
लिखना अरमानों की डोली
कैसे मुनिया मुनमुन हो ली
धन्धा-पानी ठंढी-गर्मी
चालाकी हँसती बेशर्मी
मिलन की रातें रोज़ जुदाई
दिल की दिल से हाथापाई
दिनभर ठगना और ठगाना
वादों का मुरझा सा जाना
ग़ाफ़िल है यह दुनियादारी
धोई-धाई सी मक्कारी