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गुरुवार, नवंबर 05, 2015

भइया जी यद्यपि परधानिउ हारे हैं

कयू कलट्टर यसपी का दुत्कारे हैं
नेता जी की आँखों के हम तारे हैं

यक थाना के गारद कै दूने गारद
नेता जी के अगुआरे पिछुआरे हैं

बड़े भागशाली हौ की तुम्हरे घर पे
वोट बदे भइया जी ख़ुदै पधारे हैं

तबौ कबीना मंत्री हैं तक़दीरै है
भइया जी यद्यपि परधानिउ हारे हैं

हर किसान कै फटी ज़ेब, पेटौ खाली
अपनी अपनी किस्मत के बटवारे हैं

कहैं मिठाई लाल कि ग़ाफ़िल सुगर भवा
दीवाली मा फूटे भाग हमारे हैं

-‘ग़ाफ़िल’

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-11-2015) को "एक समय का कीजिए, दिन में अब उपवास" (चर्चा अंक 2153) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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