फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Wednesday, March 08, 2017

चलो ग़ाफ़िल हम अब अपनी दुआओं का असर ढूँढें

समझ में कुछ न आता है कहाँ जाएँ किधर ढूँढें
इधर ढूँढें, उधर ढूँढें के ख़ुद को दर-ब-दर ढूँढें

मिले जी को सुक़ूँ जिससे, फ़रेबों से तिही हो जो
नए अख़बार में आओ कोई ऐसी ख़बर ढूँढें

हुआ ग़ायब है जिनका जी उन्हें मिल जाएगा पक्का
वो अपना जी नहीं ऐ बेवफ़ा तुझको अगर ढूँढें

किसी वीरान सी शब में कभी दिल के दरीचे से
हमें देखी थी जो वह क्यूँ न उल्फ़त की नज़र ढूँढें

किसी भी चीज़ की गोया नहीं ख़्वाहिश रही अपनी
न जाने क्यूँ है कहता जी के हम तुझको मगर ढूँढें

चला होगा यक़ीनन, राह में गुम हो गया होगा
चलो ग़ाफ़िल हम अब अपनी दुआओं का असर ढूँढें

-‘ग़ाफ़िल’

2 comments:

  1. चला होगा यकीनन राह में ही गुम हो गया होगा
    चलो ग़ाफ़िल हम अब अपनी दुआओं का असर ढूँढें !

    वाह ! सुभानल्लाह !

    ReplyDelete