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गुरुवार, जनवरी 26, 2012

अब छोड़िये भी!

याँ पे तो बिन बुलाये चले आइए जनाब!
खुश होइए भी और खुशी लुटाइए जनाब!!

अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए!
जाना है तो चुपके से चले जाइए जनाब!!

बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!

ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!
                                                                                              -ग़ाफ़िल 

76 टिप्‍पणियां:

  1. बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
    अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!
    वाह .......लाजवाब
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

    vikram7: कैसा,यह गणतंत्र हमारा.........

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ……रस्म निभाने को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खुब लिखा है । सुन्दर रचना ।
    आपका ब्लॉग फोलो कर लिया है । मेरे भी ब्लॉग में आयें और फोलो करें ।
    मेरी कविता

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!
    बेहतरीन।

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....

    जय हिंद... वंदे मातरम्।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी गजल मुझे आई बहुत पसंद,
    मेरे ब्लॉग पर भी कभी आइये जनाब।
    कृपया इसे भी पढ़े-
    क्या यही गणतंत्र है

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर!
    63वें गणतन्त्रदिवस की शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत खूब लिखा सुंदर प्रस्तुति,अच्छी गजल,...

    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आज के चर्चा मंच पर आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
      का अवलोकन किया ||
      बहुत बहुत बधाई ||

      हटाएं
  8. सहज सरल सुन्दर अभिव्यक्ति .

    जवाब देंहटाएं
  9. bahut umda prastuti bahut pasand aai muskura bhi rahe hain.

    जवाब देंहटाएं
  10. खूबसूरत अभिव्यक्ति ...

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    जवाब देंहटाएं
  12. गाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    खुद पर यकीन हो तो मुस्कुराइए जनाब

    क्या बात है...!
    उम्दा ग़ज़ल है गाफि़ल साहब।

    जवाब देंहटाएं
  13. Behtareen ghazal sir..

    aur ye sher..
    //बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
    अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!
    lajawaab... gazab ekdum :)

    waqt mile to mere blog par aaiyega.. ek nayi ghazal likhi hai.. ummeed karta hun aapko pasand aayegi.. :)
    palchhin-aditya.blogspot.com

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  14. पूरी मुकम्मल गज़ल, गुनगुनाने में मस्त कर देती है.

    जवाब देंहटाएं
  15. ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!
    बहुत खूब !क्या अंदाज़े ब्यान है गाफिल के .

    जवाब देंहटाएं
  16. ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!
    बढ़िया

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, मिश्र जी

    जवाब देंहटाएं
  18. सुन्दर अभिव्यक्ति....

    जवाब देंहटाएं
  19. चारो अशआर आप के अच्छे लगे मुझे,
    इस टिप्पणी का लुत्फ़ भी उठाइए जनाब.

    जवाब देंहटाएं
  20. मुस्कुरा लिए जनाब! :)
    बेहतरीन है!

    जवाब देंहटाएं
  21. अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए!
    जाना है तो चुपके से चले जाइए जनाब!!

    जवाब देंहटाएं
  22. अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए!
    जाना है तो चुपके से चले जाइए जनाब!!

    बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
    अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!

    behtreen rachna

    जवाब देंहटाएं
  23. खूबसूरत एवं सराहनीय अभिव्यक्ति.....
    कृपया इसे भी पढ़े
    नेता,कुत्ता और वेश्या

    जवाब देंहटाएं
  24. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल शनिवार .. 04-02 -20 12 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचलपर ..... .
    कृपया पधारें ...आभार .

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    आपका और अनुपमा जी की हलचल का आभार.

    जवाब देंहटाएं
  26. अच्छी प्रस्तुति ...रुक गए पढ़ा और पसंद किया ..

    जवाब देंहटाएं
  27. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  28. sir, pahli baar aapke blog par aanaa hua..aap se bahut kuch seekhne ko milega aisi ummed hai...hamare jaise naye logon ko aapke margdarshan aur protsahan ki apeksha hai..

    जवाब देंहटाएं
  29. अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए!
    जाना है तो चुपके से चले जाइए जनाब!!waah......

    जवाब देंहटाएं
  30. ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!
    gafil ji kya khoob likha hai apne ....janab ap ka nam gafil jaroor hai magar ap ki lekhani kahin se Gafil nahi hai ....behad sundar ghazal ke liye hardi badhai.

    जवाब देंहटाएं
  31. बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
    अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!

    लाजबाव प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    जवाब देंहटाएं
  32. रुके भी, पसंद भी किया, और मुस्कुराए भी । वाह गाफिल साहब वाह ।

    जवाब देंहटाएं
  33. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार ११-२-२०१२ को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

    जवाब देंहटाएं
  34. आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली का (३०) मैं शामिल की गई है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आपका स्नेह और आशीर्वाद इस मंच को हमेशा मिलता रहे यही कामना है /आभार /लिंक है
    http://hbfint.blogspot.in/2012/02/30-sun-spirit.html

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  35. ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!

    क्या बात! क्या बात!!!

    जवाब देंहटाएं
  36. bhai GAFIL JI PREM DIWAS PR HARDIK BADHAI .....ES BAR 14 FEB PR APKI RACHANA PRATEEKSHIT THI PR APNE TO SIDDH KR DIYA ...AP SACHMUCH ME GAFIL HAIN...ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
    ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!

    जवाब देंहटाएं
  37. वाह .. बहुत सुन्दर रचना,खूबसूरत प्रस्तुति

    आपका

    एक ब्लॉग सबका

    आज का आगरा

    जवाब देंहटाएं
  38. बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
    अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!
    मेरे पोस्ट पर आपका निमंत्रण है । धन्यवाद ।

    जवाब देंहटाएं
  39. सुन्दर और बेहतरीन गजल :-)

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  40. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपकी उपस्थिति पार्थनीय है । धन्यवाद ।

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    ♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
    ♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



    आपको सपरिवार
    होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
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    जवाब देंहटाएं
  42. बहुत सुंदर प्रस्तुति,
    गाफिल जी,....सपरिवार होली की बहुत२ बधाई शुभकामनाए...

    RECENT POST...काव्यान्जलि
    ...रंग रंगीली होली आई,

    जवाब देंहटाएं
  43. कहाँ हैं जनाब, होली आई और चली गई. अब तो इंतजार की घड़ियाँ समाप्त करें.आपकी नई रचनाओं की प्रतीक्षा है.

    जवाब देंहटाएं
  44. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,......

    MY RESENT POST... फुहार....: रिश्वत लिए वगैर....

    जवाब देंहटाएं
  45. वाह बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  46. नज़र न गई होती,तो कई लिंकों तक पहुंचना संभव न होता। आभार बंधुवर।

    जवाब देंहटाएं
  47. वाह बहुत सुन्दर रचना |

    जवाब देंहटाएं
  48. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति****

    जवाब देंहटाएं
  49. मंच -ए - चर्चा ,यूं ही सजातें रहें ,

    दोस्तों को यूं ही बढ़ातें/खपाते/आजमाते रहें .

    शान से आप यूं आते जाते रहें .

    शुक्रिया !

    जवाब देंहटाएं
  50. याँ पे तो बिन बुलाये चले आइए जनाब!
    खुश होइए भी और खुशी लुटाइए जनाब!!
    कुछ इधर का ,कुछ उधर का ,'

    अब कुछ तो नया लाइए ज़नाब .

    जवाब देंहटाएं
  51. अजी,आपकी महफ़िल में आने वाला मुस्कुराएगा कैसे नहीं।

    जवाब देंहटाएं
  52. प्रसन्नता बिखेरती सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें ..

    जवाब देंहटाएं
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