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मंगलवार, अगस्त 13, 2019

या के जज़्बातों में उलझे हुए हालात कहूँ

रोज़ क्यूँ वो ही कहा जाए जो भाए सबको
है बुरा क्या जो कभी रात को मैं रात कहूँ
आप कहिए! के कहूँ आप जो कहने को कहें
या के जज़्बातों में उलझे हुए हालात कहूँ

-‘ग़ाफ़िल’