Tuesday, September 20, 2022

आईना भी जो मैं हूँ दिखाता नहीं

था कभी गुलसिताँ दिल बियाबाँ है अब
कोई आता नहीं कोई जाता नहीं
क्या अजीब आजकल अपनी तक़दीर है
आईना भी जो मैं हूँ दिखाता नहीं

-‘ग़ाफ़िल’


Wednesday, June 22, 2022

ख़्वाब बाकी है

क्या कहें क्या जनाब बाकी है
नींद टूटी है ख़्वाब बाकी है
वैसे हम नींद में नहीं चलते
रात का पर हिसाब बाकी है

-‘ग़ाफ़िल’