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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, April 20, 2021

पर ये ग़फ़लत मेरी हक़ीक़त है

फ़िक़्रा ये क्या के शानो शौकत है
ये भी इक रंग है ज़ुरूरत है

लोग कहते हैं लत बुरी है यह
पर ये ग़फ़लत मेरी हक़ीक़त है

वर्ना कह देता, हूँ अभी मश्गूल
आप आए हो मुझको फ़ुर्सत है

है नज़ारों में वैसे क्या क्या पर
मेरी नज़रों को आपकी लत है

बिक तो सकता है कोई भी इंसान
इक तबस्सुम ही उसकी क़ीमत है

हुस्न आदत है इश्क़ की यानी
हुस्न यार इश्क़ की बदौलत है

हो चुकी है ग़ज़ल पर इसमें फ़क़त
एक ग़ाफ़िल और उसकी ग़फ़लत है

-‘ग़ाफ़िल’

Monday, April 12, 2021

आपका हो जाऊँगा

आपकी ख़्वाहिश है तो गोया फ़ना हो जाऊँगा
ऐसे भी पर देखिएगा आपका हो जाऊँगा

आपने ठुकरा दिया इज़्हारे उल्फ़त मेरा गर
क्या बताऊँ आपको मैं फिर के क्या हो जाऊँगा

मंज़िले उल्फ़त की जानिब मेरे हमदम आपके
पावँ तो आगे बढ़ें मैं रास्ता हो जाऊँगा

आपकी हो जाए मेरी सू निगाहे लुत्फ़ भर
देख लेना फ़र्श से मैं अर्श का हो जाऊँगा

ग़ाफ़िल और आशिक़ मिजाज़ ऐसा है गो मुश्किल मगर
याद करिए आप! था मैंने कहा हो जाऊँगा

-‘ग़ाफ़िल’