Wednesday, June 22, 2022

ख़्वाब बाकी है

क्या कहें क्या जनाब बाकी है
नींद टूटी है ख़्वाब बाकी है
वैसे हम नींद में नहीं चलते
रात का पर हिसाब बाकी है

-‘ग़ाफ़िल’

Monday, May 30, 2022

मेरा भी जी तितलियों पर मचल जाए तो क्या कहिए (1222 1222 1222 1222)

कोई छूने से आबे हैवाँ जल जाए तो क्या कहिए
किसी की आरज़ू में दम निकल जाए तो क्या कहिए

निगाहे लुत्फ़ उसका है मेरी जानिब, हूँ किस्मतवर
पर इस पल ही मेरी किस्मत बदल जाए तो क्या कहिए

है आदत बचपने की अब छुड़ाए ख़ाक छूटेगी
मेरा भी जी तितलियों पर मचल जाए तो क्या कहिए

ज़रा सोचो! ज़रा सोचो!! मैं आऊँ अंजुमन में और
उसी ही दम सुहानी शाम ढल जाए तो क्या कहिए

निशानेबाज गो माहिर हो पर अन्जाने ही ग़ाफ़िल
निशाना गर किसी सूरत सँभल जाए तो क्या कहिए

-‘ग़ाफ़िल’

आबे हैवाँ= अमृत

Thursday, March 24, 2022

फुल मस्ती

है बात और के दौरे रवाँ में मुश्क़िल है
कहाँ हँसी सा मगर रंग कोई दुनिया में

-‘ग़ाफ़िल’








Saturday, February 19, 2022

आने ने तेरे लोगों को अपना बना दिया (221 2121 1221 212)

ख़ासा था मैं और आज तमाशा बना दिया
तेरे जमाले हुस्न ने क्या क्या बना दिया

रिश्ता नहीं था लोगों से अपना कोई मगर
आने ने तेरे लोगों को अपना बना दिया

-‘ग़ाफ़िल’

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Tuesday, January 18, 2022

कभी उधार की नज़रों से मत निहार मुझे (1212 1122 1212 22)

किए हैं गोया के रुस्वा हज़ार बार मुझे
समझ रहे हैं मगर दोस्त ग़मग़ुसार मुझे

बहुत यक़ीन है नज़रों पे तेरी जानेमन
कभी उधार की नज़रों से मत निहार मुझे

-‘ग़ाफ़िल’

Saturday, January 08, 2022

चीज़ कोई भी जले यार उजाला होगा (2122 1122 1122 22)

सोचता क्यूँ है के अब आगे भला क्या होगा
सोच यह बात के जो होगा सो अच्छा होगा

जी जले, चाँद जले, शम्स* जले या दीपक
चीज़ कोई भी जले यार उजाला होगा

तेरा सामान जिसे दिल का लक़ब** हासिल है
हो कहीं पर भी मगर होगा तो अपना होगा

हमको मालूम है हमको भी करेंगे सब याद
तब के जब कोसों तलक कुछ न हमारा होगा

एक तिनके का सहारा है बहुत ग़ाफ़िल जी
बात पर ये है के क्या बह्र*** में तिनका होगा

(*सूरज, **लोगों द्वारा प्रदत्त नाम, ***समन्दर)

-‘ग़ाफ़िल’