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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Friday, January 25, 2019

वसीला

खिलेंगे फूल के गुंचे ही सूख जाएँगे
ख़ुदा की मर्ज़ी है हम तो फ़क़त वसीला हैं

-‘ग़ाफ़िल’

Saturday, January 05, 2019

लग रहे दोज़ख़ में सारे चेहरे पहचाने हुए

आइए देखें के कैसे कैसे अफ़साने हुए
किस तरह कितने बशर अपनो से बेगाने हुए

मंज़िले उल्फ़त उन्हें हासिल नहीं हो पाई गो
हाँ मगर इतना हुआ कुछ अपने दीवाने हुए

हर कोई ले लुत्फ़ यूँ सबका मुक़द्दर तो नहीं
आतिशे उल्फ़त की बाबत कुछ ही परवाने हुए

शुक्र है, गोया नहीं उम्मीद थी हमको मगर
लग रहे दोज़ख़ में सारे चेहरे पहचाने हुए

अक्स उल्टा ही दिखाएँगे है ज़िद ये कैसी ज़िद
ग़ाफ़िल ऐसे जाने क्यूँ हर आईनाख़ाने हुए

-‘ग़ाफ़िल’