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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Friday, November 23, 2012

शहर को जलते देखा

हुस्न को आज सरे राह मचलते देखा
एक शोला सा उठा शह्र को जलते देखा
मैं तो ग़ाफ़िल था तिरे ज़ल्वानुमा होने से
मोम तो मोम थी पत्थर भी पिघलते देखा

-‘ग़ाफ़िल’

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Friday, November 02, 2012

वह बंजारे की रात कहाँ?

(पृष्ठभमि चित्र गूगल से साभार)


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