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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Monday, September 30, 2013

लूटि लियो मेरो दिल को गल्ला

लूटि लियो मेरो दिल को गल्ला

ग़ाफ़िल! मैं तो सेठानी थी
कियो भिखारिन छिन में लल्ला

सौंपि दीन्हि तोहे सिगरौ पूँजी
मान बढ़ायो केकर भल्ला

जौ जानित हौ निपट स्वारथी
काहे फाँनित आपन जल्ला

अब तौ चिरई खेत चूँगि गै
व्यर्थ है मोर मचाइब हल्ला

लूटि लियो मेरो दिल को गल्ला

हाँ नहीं तो!

Saturday, September 14, 2013

मुझे मेरा यार लूटा

(साँप का चित्र गूगल से साभार)

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Thursday, September 05, 2013

फिर भी नफ़रत सीख ले!

मान जा ऐ दिल
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!

तुझको जीना है
जख़्म सीना है
रात काली है
और दिवाली है

लुट चुकी अस्मत
मिट चुकी क़िस्मत
हुस्न है फन्दा
फंस गया बन्दा

कहता ये ग़ाफ़िल
ना भी बन क़ातिल
फिर भी नफ़रत सीख ले!

मान जा ऐ दिल
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!

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