जान लो क़त्ल हो गया अपना
नैन उससे अगर मिला अपना
तू ही था अपना पर है ग़ैर का अब
दिल तो वैसे भी कब रहा अपना
मैक़दा है ये पास आजा अदू
साथ याँ कौन है दिया अपना
अब तलक आलमे बेहोशी है
मुस्कुराकर कोई कहा अपना
हार अपनी कहूँ के जीत कहूँ
जो है जीता वो ख़ास था अपना
शाने महफ़िल है क़स्म से ग़ाफ़िल
शे’र मारा हुआ तेरा अपना
(अदू=दुश्मन)
-‘ग़ाफ़िल’