Thursday, July 07, 2016

जलाना है अगर कुछ तो ग़मे फ़ुर्क़त जला देना

समझ में कुछ नहीं आए मुझे वापस है क्या देना
मिला जो प्यार मुझको उसके बदले में, ...बता देना!

हैं मेरे पास तो धोख़े हज़ारों किस्म के फिर भी
बना है सिलसिला अब तक मेरा लेना तेरा देना

बुझाने के लिए मुद्दत की मेरी तिश्नगी है तो
जलाना है अगर कुछ तो ग़मे फ़ुर्क़त जला देना

निकल आएगी ही सूरत कोई उस तक पहुँचने की
अरे ओ दिलनशीं! ख़ुद के ज़रा दिल का पता देना

किसी ग़ाफ़िल को गरचे इश्क़ फ़र्माए कोई तो क्यूँ
बहुत आसान है आसान यह जुम्ला सुना देना

-‘ग़ाफ़िल’

Sunday, July 03, 2016

ज़रा सोचता मुस्कुराने से पहले

वो आए किसी भी बहाने से पहले
उसे देखना है ठिकाने से पहले

बताओ भला इश्क़ की भी इजाज़त
अरे यार क्या लूँ ज़माने से पहले

चलाया वो तीरे नज़र और लगा भी
मगर हिचकिचाया चलाने से पहले

मेरी धडकनों के भी बावत सितमगर
ज़रा सोचता मुस्कुराने से पहले

कहाँ हौसला था उठाने का परबत
हसीनों के नख़रे उठाने से पहले

ज़रा झाँकना आईने में भी ग़ाफ़िल
मुझे इश्क़ में आज़माने से पहले

-‘ग़ाफ़िल’