कभी मुझसा कोई कहता नहीं है
मगर कोई मेरी सुनता नहीं है
हज़ारों हैं रहे उल्फ़त में लेकिन
कोई तुमसा मुझे जँचता नहीं है
अरे! तू मुस्कुरा लेता है कैसे
ये ग़ुस्ताख़ी कोई करता नहीं है
यूँ पर्दादारी भी क्या पर्दादारी
दुपट्टा अब तेरा उड़ता नहीं है
बड़े अफ़सोस की है बात अब तू
अदा-ए-शोख़ पर मरता नहीं है
है चर्चे में तेरी वादाखि़लाफ़ी
मगर तू शर्म से गड़ता नहीं है
मसन्निफ़ कम नहीं हैं आज यारो!
हक़ीक़त पर कोई लिखता नहीं है
तुझे मंज़िल तो मिल जाती ही ‘ग़ाफ़िल’
मगर सच में तू दम भरता नहीं है
-‘ग़ाफ़िल’
मगर कोई मेरी सुनता नहीं है
हज़ारों हैं रहे उल्फ़त में लेकिन
कोई तुमसा मुझे जँचता नहीं है
अरे! तू मुस्कुरा लेता है कैसे
ये ग़ुस्ताख़ी कोई करता नहीं है
यूँ पर्दादारी भी क्या पर्दादारी
दुपट्टा अब तेरा उड़ता नहीं है
बड़े अफ़सोस की है बात अब तू
अदा-ए-शोख़ पर मरता नहीं है
है चर्चे में तेरी वादाखि़लाफ़ी
मगर तू शर्म से गड़ता नहीं है
मसन्निफ़ कम नहीं हैं आज यारो!
हक़ीक़त पर कोई लिखता नहीं है
तुझे मंज़िल तो मिल जाती ही ‘ग़ाफ़िल’
मगर सच में तू दम भरता नहीं है
-‘ग़ाफ़िल’