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शुक्रवार, जून 23, 2017

मगर उल्फ़त के अफ़साने रहेंगे

आदाब दोस्तो! यह दो शे’र आप सबके हवाले-

सफ़र की राह ही यूँ है के साथ अब
रहेंगे गर तो वीराने रहेंगे
भले ही दुनिया से उठ जाएँ उश्शाक़
मगर उल्फ़त के अफ़साने रहेंगे

-‘ग़ाफ़िल’