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गुरुवार, जनवरी 26, 2012

अब छोड़िये भी!

याँ पे तो बिन बुलाये चले आइए जनाब!
खुश होइए भी और खुशी लुटाइए जनाब!!

अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए!
जाना है तो चुपके से चले जाइए जनाब!!

बन तो गया हूँ बुत मैं भले संगेमरमरी,
अब छोड़िए भी और न बनाइए जनाब!!

ग़ाफ़िल हूँ मेरी बात हंसी में उड़ाइए!
ख़ुद पर यक़ीन हो तो मुस्कुराइए जनाब!!
                                                                                              -ग़ाफ़िल