हो चुके फ़ाकेहात फीके से।
आज के इख़्तिलात फीके से॥
हसीन मिस्ले-शहर मयख़ाने,
लगते अब घर, देहात फीके से।
साथ साक़ी का हाथ में प्याला,
यूँ तो हर एहतियात फीके से।
बस उसके ख़ाब में मेरा खोना
और हर मा’लूमात फीके से।
चख चुका अब शराबे-लब ग़ाफ़िल,
अब तो आबे-हयात फीके से॥
(फ़ाकेहात=ताज़े हरे मेवे जैसे सेब आदि, इख़्तिलात= चुम्बन आलिंगन आदि, आबे-हयात= अमृत)
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आज के इख़्तिलात फीके से॥
हसीन मिस्ले-शहर मयख़ाने,
लगते अब घर, देहात फीके से।
साथ साक़ी का हाथ में प्याला,
यूँ तो हर एहतियात फीके से।
बस उसके ख़ाब में मेरा खोना
और हर मा’लूमात फीके से।
चख चुका अब शराबे-लब ग़ाफ़िल,
अब तो आबे-हयात फीके से॥
(फ़ाकेहात=ताज़े हरे मेवे जैसे सेब आदि, इख़्तिलात= चुम्बन आलिंगन आदि, आबे-हयात= अमृत)
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