सच है यह, तुझसे कोई रिश्ता नहीं
जी तेरे बिन पर कहीं लगता नहीं
है तस्सवुर ही ठिकाना वस्ल का
इश्क़ मुझसा भी कोई करता नहीं
ये भी है तीरे नज़र का ही कमाल
दिल है घाइल उफ़् भी कर सकता नहीं
दर्द है गर तो दवा भी इश्क़ है
इश्क़ सा कुछ और हो सकता नहीं
क्या करोगे आस्तीनों के सिवा
साँप अब दूजी जगह पलता नहीं
घूमता हूँ शह्र की गलियों में पर
मुझको तेरे सा कोई जँचता नहीं
दाद तो ग़ाफ़िल को मिल जाएगी मुफ़्त
मुफ़्त का खाया मगर पचता नहीं
-‘ग़ाफ़िल’
जी तेरे बिन पर कहीं लगता नहीं
है तस्सवुर ही ठिकाना वस्ल का
इश्क़ मुझसा भी कोई करता नहीं
ये भी है तीरे नज़र का ही कमाल
दिल है घाइल उफ़् भी कर सकता नहीं
दर्द है गर तो दवा भी इश्क़ है
इश्क़ सा कुछ और हो सकता नहीं
क्या करोगे आस्तीनों के सिवा
साँप अब दूजी जगह पलता नहीं
घूमता हूँ शह्र की गलियों में पर
मुझको तेरे सा कोई जँचता नहीं
दाद तो ग़ाफ़िल को मिल जाएगी मुफ़्त
मुफ़्त का खाया मगर पचता नहीं
-‘ग़ाफ़िल’