Monday, July 09, 2018

तुम गुलाब हो जाना

हर्फ़ हर्फ़ बिखरा हूँ वैसे तो फ़ज़ाओं में
लोग पढ़ सकें मुझको तुम किताब हो जाना
साथ इस तरीक़े से और हम निभा लेंगे
ख़ार हूँ मैं गुलशन का तुम गुलाब हो जाना

-‘ग़ाफ़िल’

Friday, July 06, 2018

अरे वाह!!

🔥राख कर देती है छू भर जाए ग़ाफ़िल जिस्म से
आग की हर इक लपट आँखों को पर भाती है खूब🔥

नमन् साथियो! गणित तो आती नहीं कि गिनकर बताऊँ कितना साल हुआ पर सन् 1988 का आज ही का रोज़ था जब ढोल बाजे के साथ उत्सव मनाते हुए मुझे भी अर्द्धांगिनी के रूप में यह हसीन तोहफ़ा प्राप्त हुआ था

-‘ग़ाफ़िल’