Friday, March 13, 2020

वो जो दिल में कभी ख़ुदा से रहे

उसका हो क्या के उनके बिन महरूम
आजतक हम जो दस्तो पा से रहे
उनको रहना न वैसे रास आया
वो जो दिल में कभी ख़ुदा से रहे

-‘ग़ाफ़िल’
(चित्र गूगल से साभार)

Thursday, March 05, 2020

लगी है चोट दिल पर और ये सर पर समझता है

भले अपना तू कह कितना मगर क्या घर समझता है
मुसल्सल हाले दिल तो मील का पत्थर समझता है

समझ में यह नहीं आता के रस्ते का खटारापन
सने ख़ूँ से ये मेरे पा के यह रहबर समझता है

दिखावे के लिए कर ले तग़ाफ़ुल ठीक है गोया
मुझे है इल्म तू जी की मेरे जी भर समझता है

नहीं समझा कहे कितना भी ये माना न जाएगा
तुझे अपना बनाना मेरा तू बेहतर समझता है

जो सर पे हाथ फेरे जा रहा ग़ाफ़िल है चारागर
लगी है चोट दिल पर और ये सर पर समझता है

-‘ग़ाफ़िल’