Thursday, September 02, 2021

हवा भी ऐसी जो ले ग़र्द-ओ-ग़ुबार चले (1212 1122 1212 22)

चले न तीरे नज़र जब न बेशुमार चले
हमारी सिम्त चले गर तो बार-बार चले

जिसे था आना न आया वो जाने इस बाबत
हम इंतज़ार में ये ज़िन्दगी गुज़ार चले

हुज़ूर साँस भी लूँ क्या हवा के झोंके हैं
हवा भी ऐसी जो ले ग़र्द-ओ-ग़ुबार चले

हम ऐसे हैं के तग़ाफ़ुल न कर सकेंगे कभी
वो कैसे थे के हमें करके दरकिनार चले

न सोगवार हों आप इश्क़ तो हुआ ग़ाफ़िल
भले ही प्यार की बाजी हुज़ूर हार चले

-‘ग़ाफ़िल’

Sunday, August 22, 2021

सलीके से जो देखो आईना चेहरा दिखा देगा

अभी तक हो नहीं पाया है गोया ऐसा जादूगर
के दुनिया में है जैसा जो उसे वैसा दिखा देगा
मगर फिर भी, मेरे महबूब का नाम आप मत पूछो
सलीके से जो देखो आईना चेहरा दिखा देगा

-‘ग़ाफ़िल’