Saturday, May 27, 2017

लीजिए वह लुत्फ़ जो ले पाइए

और अब संदेश मत भिजवाइए
लानी हो तशरीफ़ जब भी, लाइए

हैं नहीं कम ज़िन्दगी में पेचो ख़म
आप भी थोड़ा बहुत उलझाइए

तारी हो उल्फ़त का अब कुछ यूँ सुरूर
ख़ुद बहकिए मुझको भी बहकाइए

कौन है जो कह दिया दौराने इश्क़
आप भी मेरी तरह शर्माइए

आपसे उम्मीद गो ऐसी न थी
ख़ैर फिर भी जा रहे तो जाइए

दूध के धोए नहीं हैं आप भी
देख मुझको मुँह न यूँ बिचकाइए

मेरे जिस्मो जान से ग़ाफ़िल जी आज
लीजिए वह लुत्फ़ जो ले पाइए

-‘ग़ाफ़िल’

Friday, May 26, 2017

तूने बात और ही छुपाई है

मैंने भी दुनिया ख़ूब देखी है
है पता खट्टी है के मीठी है

एक तूफ़ान जो है सीने में
क़श्ती-ए-ज़ीस्त डूबी जाती है

ज़िन्दगी हो सकी न अपनी तू
किसकी होने की क़स्म खाई है

जाना आना तेरा भी है जैसे
साँस जाती है साँस आती है

ख़ुश्बू यह तिर रही फ़ज़ाओं में जो
कोई चूनर हवा उड़ाई है

मुझमे मेरा ही अक्स ढूँढ रहा
तू ज़माने सा ही फरेबी है

इश्क़ ग़ाफ़िल छुपाए छुप न सके
तूने बात और ही छुपाई है

-‘ग़ाफ़िल’