एहसासात
क़त्आ
कविता
कुछ अधूरा सा
कुण्डलियां
क्षणिकाएँ
ग़ज़ल
गीत
दो शे’र
दोहे
नज़्म
फ़र्द
मुक्तक
रुबाइयाँ
लघु-कथा
लिंक
शब्बाख़ैर!
शादी की सालगिरह
शुभकामना
सुप्रभात!
स्पेशल
हज़ल
हास्य-व्यंग्य
Links
Ghafalton ki Duniya
kd10 से यूनिकोड
बेसुरम्
ग़ाफ़िल
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
सी. बी. मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
Wednesday, January 31, 2018
एक शे’र आज के चाँद के नाम-
रुख़ ढकने का लाख जतन पर नक़ाब सरका जाता है
ग़ाफ़िल तो लट्टू हो बैठा चाँद की पर्दादारी पर
-‘ग़ाफ़िल’
हमारी दो ग़ज़ल अमर उजाला दैनिक के पोटल पर, हेडिंग पर क्लिक करें और आप सब ज़ुरूर लुत्फ़ लें-
1-
नये अख़बार में आओ कोई ऐसी ख़बर ढूंढें
2-
रब का नहीं तो तेरा ही चेहरा दिखाई दे
-‘ग़ाफ़िल’
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)