Thursday, June 28, 2018

अहद यह थी के उस ही दम ज़माना छोड़ देना था

मुझे है याद क्या क्या जाने जाना छोड़ देना था;
तेरा हर हाल मुझको आज़माना छोड़ देना था।

है छूट उल्फ़त में नज़रों से फ़क़त, पीने पिलाने की;
ज़रीयन दस्त मै पीना पिलाना छोड़ देना था।

हर आशिक़ को ख़ुदा के बंदे का है मर्तबा हासिल;
अरे यह क्या के उसको कह दीवाना छोड़ देना था।

अगर आए कभी आड़े ज़माना इश्क़ में अपने;
अहद यह थी के उस ही दम ज़माना छोड़ देना था।

रक़ीबों की रहन है क्या इसी बाबत भला मुझको;
तेरे दिल के नगर तक आना जाना छोड़ देना था।

ये माना है नया साथी नया रास्ता नयी मंज़िल;
मगर क्या तज़्रिबा अपना पुराना छोड़ देना था।

समझता रब है ख़ुद को उसको तो ग़ाफ़िल बहुत पहले;
भले कितना भी है वो जाना माना, छोड़ देना था।

-‘ग़ाफ़िल’

Wednesday, June 27, 2018

आ तू भी


💘

तू भी मुझसे खफ़ा है आज के रोज़?
चाँद तारों में जा छुपा तू भी!
क़त्ल मेरा किया है शौक से तो
अब जनाज़ा उठाने आ तू भी!!

-‘ग़ाफ़िल’