Saturday, February 20, 2021

जिधर देखो इशारे हो रहे हैं (1222 1222 122)

ये देखो रंग प्यारे हो रहे हैं
अरे! सारे के सारे हो रहे हैं

कोई तो ख़ूबी-ए-नौ आई हममें
जो थे ग़ैर अब हमारे हो रहे हैं

हुआ अच्छा किनारा कर ली किस्मत
हम अब अपने सहारे हो रहे हैं

हरूफ़ अपने गँवा बैठी ज़ुबाँ क्या
जिधर देखो इशारे हो रहे हैं

हैं हम जैसे रहेंगे वैसे ग़ाफ़िल
भले किस्मत के मारे हो रहे हैं

-‘ग़ाफ़िल’

Friday, February 12, 2021

ग़ज़ल गुनगुनाने के दिन आ रहे हैं

आदाब दोस्तो! ‘‘नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं’’ वाली फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ साहब की ग़ज़ल की ज़मीन पर आप सबकी ख़िदमत में पेश हैं अपने भी चंद ताज़ा अश्आर-

सब उन पर लुटाने के दिन आ रहे हैं
लो दिल के ख़ज़ाने के दिन आ रहे हैं

बहुत हो चुके मौसिमों के बहाने
हुज़ूर आने जाने के दिन आ रहे हैं

बहार आने को है तुम आओ तो माने
के अब मुस्‍कुराने के दिन आ रहे हैं

जो सीखे सलीके मुहब्बत के अब तक
वो फ़न आज़माने के दिन आ रहे हैं

मुहब्बत ने अँगड़ाई ली जी में, शायद
ग़ज़ल गुनगुनाने के दिन आ रहे हैं

-‘ग़ाफ़िल’