फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Saturday, July 02, 2011

चाँदनी भी जलाया करती है

यूँ शबो-रोज़ आया करती है,
याद उसकी रुलाया करती है।
वो मुसाफ़िर हूँ मैं जिसे अक्सर;
चाँदनी भी जलाया करती है।।
                                                       -ग़ाफिल

32 comments:

  1. मैंने भी आह का असर देखा,
    एक भूचाल सा अक्सर देखा।

    जी,गाफिल जी,आह में बड़ा असर होता ही.किसी का एक शेर याद आ रहा है.शेर यूँ है:-
    मेरी आह का तुम असर देख लेना.
    वो आयेंगे थामे जिगर देख लेना.

    ReplyDelete
  2. मैंने भी आह का असर देखा,
    एक भूचाल सा अक्सर देखा।
    और देखा कि आह इक पल में;
    सल्तनतें मिटाया करती है।
    .....bahut hi badhiyaa

    ReplyDelete
  3. बहुत ख़ूबसूरत नज़्म।

    ReplyDelete
  4. वो मुसाफ़िर हूँ मैं जिसे अक्सर;
    चाँदनी भी जलाया करती है।।

    बहुत खूबसूरत रचना ...

    ReplyDelete
  5. जब सरे-शाम अदा-ए-खंज़र;
    शोख चश्मी दिखाया करती है।

    तब तो

    चाँदनी भी जलाया करती है।।

    सही है भाई ||

    ReplyDelete
  6. मेरे सपनों ने नहीं साथ दिया,
    मेरे अपनो ने नहीं हाथ दिया।
    दिल में रहकर ही तमन्ना-ए-दिल;
    मुझको हरदम सताया करती है।।
    --
    बहुत सुन्दर भावों के साथ सजा-सँवरा हुआ गीत!

    ReplyDelete
  7. दिल में रहकर ही तमन्ना-ए-दिल;
    मुझको हरदम सताया करती है।।

    sahi hai tamannaye jab tak puri nahi hoti, jalaya karti hain,
    magar sach hai yahi bhi,
    ki tamanna puri hone par uska matwa bhi kya raha jata hai....

    bachchan sahab ne sahi kaha tha..."mazaa nahi paa jane me jo hai paane ke armaano me"..

    khoobsoorat abhivyakti..

    ReplyDelete
  8. बेहतरीन...सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  9. ग़ाफ़िल अब सैफ़ का भी करना क्या,
    फ़ज़ूल ग़ैब का भी मरना क्या।
    beautiful Gazal

    ReplyDelete
  10. मेरे सपनों ने नहीं साथ दिया,
    मेरे अपनो ने नहीं हाथ दिया।
    दिल में रहकर ही तमन्ना-ए-दिल;
    मुझको हरदम सताया करती है।।

    bahut sunder abhivyakti....

    ReplyDelete
  11. यूँ शबो-रोज़ आया करती है,
    याद उसकी रुलाया करती है।
    वो मुसाफ़िर हूँ मैं जिसे अक्सर;
    चाँदनी भी जलाया करती है।।
    बहोत खूब.....

    ReplyDelete
  12. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 05 - 07 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 53 ..चर्चा मंच 566

    ReplyDelete
  13. मैंने भी आह का असर देखा,
    एक भूचाल सा अक्सर देखा।
    और देखा कि आह इक पल में;
    सल्तनतें मिटाया करती है

    Khoob.... Sanvedansheel bhav

    ReplyDelete
  14. खूबसूरत गजल , बधाई

    ReplyDelete
  15. har line ek- se- badhkar ek.....

    ReplyDelete
  16. बहुत ही सुन्दर गज़ल.

    ReplyDelete
  17. बहुत उम्दा रचना है सर, आनंद आ गया पढ़कर...
    सादर...

    ReplyDelete
  18. वाह!! बेहतरीन रचना.

    ReplyDelete
  19. मैंने भी आह का असर देखा,
    एक भूचाल सा अक्सर देखा।
    और देखा कि आह इक पल में,
    सल्तनतें मिटाया करती है।

    बहुत ख़ूब ग़ाफिल साहब।
    अच्छे भाव , सुंदर शब्द।

    ReplyDelete
  20. सभी मुक्तक बहुत सुन्दर...अर्थपूर्ण
    सीधे दिल में उतरती हैं पंक्तियाँ.....

    ReplyDelete
  21. गाफिल जी,
    सपने तो सपने होते हैं,
    ये तो कब अपने होते हैं.
    सच में,आपकी अभिव्यक्ति अत्यंत प्रभाव शाली है.
    धन्यवाद.
    आनन्द विश्वास
    अहमदाबाद.

    ReplyDelete
  22. मेरे सपनों ने नहीं साथ दिया,
    मेरे अपनो ने नहीं हाथ दिया।
    दिल में रहकर ही तमन्ना-ए-दिल;
    मुझको हरदम सताया करती है।।

    ...बहुत ख़ूबसूरत भावपूर्ण रचना..

    ReplyDelete
  23. bahut bahut khoobsurat najm.har line bahtreen hai.

    ReplyDelete
  24. aapke blog ka anusaran kar rahi hoon taki aapki update ghazalon ko padh sakoon.bahut achcha likhte hai aap.

    ReplyDelete
  25. waaaaaaaaaaah kya baat hai...bahut bhaav-pravan aur khoobsurat umda rachna.

    ReplyDelete
  26. सुंदर गेय रचना के लियें
    आभार..

    ReplyDelete
  27. vastav men behatreen rachna, badhai

    ReplyDelete
  28. khoob likha hai. lagata hai koee teere neemkash se bidh gaye hai!!!!!

    ReplyDelete