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मंगलवार, दिसंबर 09, 2014

दुबारा हँसके

जैसे मामूल निभाया है दुबारा हँसके।
फिर कोई फूल नुमाया है दुबारा हँसके॥

जुल्फ-ज़िन्दाँ में ही इक उम्र गुज़ारी हमने,
फिर कोई जाल बिछाया है दुबारा हँसके।

बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके।

नीद ही टूटती आयी थी ख़ाब बाकी थे,
फिर कोई ख़ाब दिखाया है दुबारा हँसके।

थी कहाँ फ़िक्र ही 'ग़ाफ़िल' को गुमशुदा दिल की,
फिर कोई याद दिलाया है दुबारा हँसके॥
(मामूल=सामान्यचर्या, नुमाया=द्रष्टव्य, ज़ुल्फ़ जिन्दाँ=ज़ुल्फ़ रूपी कारागार, संग=पत्थर)
                                                               -ग़ाफ़िल

23 टिप्‍पणियां:

  1. बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
    फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके।

    वाह, साहब, क्या बात है।
    बहुत बढ़िया ग़ज़ल।
    बधाई स्वीकार करें।

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  2. दुबारा हँसना तो परेशानी का सबब बन गया ||
    यह किधर मन गया ??
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ||
    बहुत बधाई ||

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  3. Gafil sahab,
    ye sang(patthar) jyada jor se to nahin laga?

    उत्तर देंहटाएं
  4. थी कहाँ फ़िक्र ही 'ग़ाफ़िल' को गुमशुदा दिल की,
    फिर कोई याद दिलाया है दुबारा हँसके॥
    --
    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल!
    यह हँसी हमेशा कायम रहे!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
    फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके।

    नीद ही टूटती आयी थी ख़ाब बाकी थे,
    फिर कोई ख़ाब दिखाया है दुबारा हँसके।


    बहुत खूबसूरत गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  6. बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
    फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके।...maja aa gaya itni pyaari ghazal padhkar..umda ghazal

    उत्तर देंहटाएं
  7. जुल्फ-ज़िन्दाँ में ही इक उम्र गुज़ारी हमने,
    फिर कोई जाल बिछाया है दुबारा हँसके।

    ...बहुत खूब ! लाज़वाब गज़ल ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. नीद ही टूटती आयी थी ख़ाब बाकी थे,
    फिर कोई ख़ाब दिखाया है दुबारा हँसके।

    beautiful poem

    उत्तर देंहटाएं
  9. बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
    फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके।

    वाह! वाह!!
    क्या बात कही है ग़ाफ़िल साहब!

    पत्थर चलाकर दिल तोड़ने वाले को इसी में मज़ा आता है!!

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  10. खूबसूरत गज़ल...........
    बस अभी दिल के झरोखों की मरम्मत की थी,
    फिर कोई संग चलाया है दुबारा हँसके...................
    वाह क्या बात है...

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  11. बेहतरीन अन्दाज़े बयाँ......

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  12. नीद ही टूटती आयी थी ख़ाब बाकी थे,
    फिर कोई ख़ाब दिखाया है दुबारा हँसके।

    बहुत सुंदर।

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  13. बहुत प्यारी ग़ज़ल गाफिल साहब !
    हर शेर अर्थपूर्ण....जानदार

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  14. gazal ka ek ek sher lajavab hai bahut sunder nind hi ................wala sher to kamal hai
    bahut bahut badhai
    saader
    rachana

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  15. bahut achchi ghazal!!!urdu aur hindi ke saral shbdo ke prayog ne ese aur sarv sulabh bana diya. sadhuvad

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  16. दिल के झरोखों की मरम्मत---बात है खूबसूरत..।

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  17. थी कहाँ फ़िक्र ही 'ग़ाफ़िल' को गुमशुदा दिल की,
    फिर कोई याद दिलाया है दुबारा हँसके॥
    बहुत अच्छी गज़ल । बधाई ...

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  18. थी कहाँ फ़िक्र ही 'ग़ाफ़िल' को गुमशुदा दिल की,
    फिर कोई याद दिलाया है दुबारा हँसके॥

    waah ! Beautiful ghazal.

    .

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