फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

मेरी फ़ोटो

मेरे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

बुधवार, जुलाई 13, 2011

क्यूँ?

क्यूँ अब इस बस्ती में अक्सर हैवान ही पाए जाते हैं?
भोली-भाली सूरत वाले शैतान ही पाए जाते हैं॥

क्यूँ इंसानों की बदहालत बदतर ही होती जाती है?
सतरंगी सपने दिखलाकर नादान नचाए जाते हैं।

उनके मतबख में शाम सरह है गोश्त पके इंसानों का,
सूखी लकड़ी के बदले क्यूँ इंसान जलाये जाते हैं?

क्यूँ ममता रोज़ बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?

‘ग़ाफ़िल’ यह कैसी अनहोनी यह कैसे बेड़ा ग़र्क़ हुआ
क्यूँ दो कौड़ी की क़ीमत पर ईमान भुनाये जाते हैं?

(मतबख=पाकशाला)

-‘ग़ाफ़िल’                        

37 टिप्‍पणियां:

  1. ग़ाफ़िल' क्या हुआ ज़माने को? ये कैसे बेड़ा ग़र्क़ हुआ?
    क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर, ईमान भुनाये जाते हैं?



    -बहुत शानदार.....सच बयानी!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर कोई लालच के करीब हुआ
    अपनों से दूर हुआ
    नहीं कोई जात ऐसे इंसान की .....

    उत्तर देंहटाएं
  3. सूखी लकड़ी के बदले क्यूँ इंसान जलाये जाते हैं?

    गाफिल जी ये आपकी सबसे अच्छी रचनाओं में से एक है |
    हर पंक्ति में आग है और यहाँ ----
    बड़ी मुहब्बत से यारा , ये पाठक जलाए जाते हैं ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. kyun aakhir kyun ....... prashn sar patak rahe , koi kuch kahta hi nahi.

    उत्तर देंहटाएं
  5. भोली-भाली सूरत वाले शैतान ही पाए जाते हैं
    beautiful poem

    उत्तर देंहटाएं
  6. @ सूखी लकड़ी के बदले क्यूँ इंसान जलाये जाते हैं?
    बहुत ही क्रूर सच है यह!

    उत्तर देंहटाएं
  7. 'ग़ाफ़िल' क्या हुआ ज़माने को? ये कैसे बेड़ा ग़र्क़ हुआ?
    क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर, ईमान भुनाये जाते हैं?

    खूब मक्ता निकाला है....बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.......शानदार |

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. क्या बात है, बहुत सुंदर

    उनके मतबख में रोज-रोज, है गोश्त आदमी का पकता,
    सूखी लकड़ी के बदले क्यूँ इंसान जलाये जाते हैं?

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्यूँ ममता रोज बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
    इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?
    --
    बहुत सार्थक प्रश्न!

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्यूँ ममता रोज बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
    इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?

    बहुत मर्मस्पर्शी और सारगर्भित प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  12. ग़ाफ़िल' क्या हुआ ज़माने को? ये कैसे बेड़ा ग़र्क़ हुआ?
    क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर, ईमान भुनाये जाते हैं?
    julfe zinda se nikalkar aap bahar aa gaye...ab falak pe aap bankar prashna phir se cha gaye...is hawas ki hi bajah ham aise hote ja rahe...aadmi paida hue robot hote ja rahe

    उत्तर देंहटाएं
  13. क्यूँ ममता रोज बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
    इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?

    भावमय करते शब्‍दों के साथ सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. प्रभावित करती प्रस्तुति ......

    उत्तर देंहटाएं
  15. आपसे जुड़ना अच्छा लगा। बस्ती रहा हूँ चार साल। कभी आया तो मुलाकात होगी। बस्ती का अनुभव यहां लिखा है......
    http://devendra-bechainaatma.blogspot.com/2010/12/blog-post_11.html
    ..पढ़कर देखिए, अच्छा लगेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  16. वर्तमान हालात की विसंगतियों का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करती बढ़िया ग़ज़लं।

    उत्तर देंहटाएं
  17. क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर, ईमान भुनाये जाते हैं

    भाई जी यह आप का ही नहीं सारी मानव सभ्यता का दर्द है| बधाई स्वीकार करें इस सार्थक प्रस्तुति के लिए|

    उत्तर देंहटाएं
  18. कलम तड़फती है,रोती - चिल्लाती है,
    तब ऐसी रचनायें सम्मुख आती हैं.
    आपके आशीर्वाद के लिये आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  19. आज की प्रगति शीलता की दौड़ में यदि किसी का पतन हुआ है तो इंसान का, यदि कोई पीछे छूट गया है तो मानवता, यदि बिक गया है तो ईमान और कोई छेज सास्ती हुई है तो इंसान की जिंदगी. सारी बातों को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से बया किया है. लक्षणा और व्यंजना तो वैसे ही मारक और तीखी होती हैं, आपने बहुत सही प्रयोग किया है उन शब्द शक्तियों का. बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति |बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  21. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  22. भावमय करते शब्‍दों के साथ सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  23. मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
    ' नीम ' पेड़ एक गुण अनेक..........>>> संजय भास्कर
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

    उत्तर देंहटाएं
  24. वर्तमान परिस्थिति पर प्रश्न चिन्ह लगाती सार्थक गजल .....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  25. संजीदा सवालात....
    यह 'क्यों' आज नाग की तरह फन फैलाए खडा है और उत्तर के नाम पर हमारे पास है केवल मौन....
    लाज़वाब ग़ज़ल....
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  26. क्यूँ ममता रोज बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
    इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?
    बहुत ही अच्छी प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  27. आप सभी शुभचिंतकों को मेरी रचना पढ़कर उस पर माकूल टिप्पणी दर्ज़ करने का बहुत-बहुत आभार और धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  28. गाफिल क्या हुआ ज़माने को ? ये कैसा बेडा गर्क हुआ ?
    क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर,ईमान भुनाए जाते हैं ?
    .........................व्याकुल भावों का जोरदार शेर
    ..................उम्दा ग़ज़ल , हर शेर बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  29. आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

    उत्तर देंहटाएं
  30. मिश्र जी नमस्कार्। आपका ब्लाग देखा मुझे आपकी ए रचना अच्छी लगी।-- क्या हुआ ज़माने को? ये कैसे बेड़ा ग़र्क़ हुआ?क्यूँ दो कौड़ी की कीमत पर, ईमान भुनाये जाते हैं?बहुत सुन्दर लाइनें।जयहिन्द।

    उत्तर देंहटाएं
  31. क्यूँ ममता रोज बिलखती है? क्यूँ भाईचारा मरता है?
    इक प्यार की सिसकन के सुर में, क्यूँ गीत सजाये जाते है?..

    I don't think anyone can answer this question...

    .

    उत्तर देंहटाएं