फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

मेरी फ़ोटो

मेरे बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

मंगलवार, नवंबर 08, 2011

चिकनी राह बुलाए गाफिल!

मन का घोड़ा बाँध रखा था, छोड़ा नहीं मचलने को।
पानी सर से ऊपर है, अब मौका नहीं सँभलने को॥

चाँद रहा है मिसाल हरदम रुखे-माहपारावों का,
हम हैं के आमादा उसको पावों तले कुचलने को।

आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।

यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

फ़ित्रत है तो चलते रहना मज़्बूरी सी है गोया
चिकनी राह बुलाए ग़ाफ़िल अपनी सिम्त फिसलने को।

48 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है सर, बहुत सुंदर


    आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
    भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।

    उत्तर देंहटाएं
  2. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    बहुत हि बेहतरीन रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    Wah ... Bahut Sunder Panktiyan...

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपके पोस्ट पर आना सार्थक लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  5. चाँद रहा है मिसाल हरदम रुखे-माहपारावों का,
    हम हैं के आमादा उसको पावों तले कुचलने को।
    बेमिसाल!
    पूरी ग़ज़ल अच्छी लगी, यह शे’र बहुत भाया।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मन का घोड़ा बाँध रखा था, छोड़ा नहीं मचलने को।
    पानी सर से ऊपर है, अब मौका नहीं सँभलने को॥

    umdaa....bahut khub

    उत्तर देंहटाएं
  7. Chalna ne samjhen mazboori
    Chalna to bhai hai jeevan
    Gar ruke thahar hi jaenge
    Bolo jo asatya kaha sajjan!

    उत्तर देंहटाएं
  8. चन्द्र भूषण जी,...आपकी गजल मुझे अच्छी लगी..प्रभावित होकर मै
    आपका फालोवर बन गया हूँ..मेरे नए पोस्ट में स्वागत है..
    आपसे अनुरोध है की -चर्चा मंच- में नए लोगो को शामिल करे ताकी लोगों में उत्साह बना रहेगा...धन्यबाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. चन्द्र भूषण जी,..आप मेरे मुख्य ब्लॉग काव्यांजली में
    नई पोस्ट "वजूद" पर हार्दिक स्वागत है..प्लीज...

    उत्तर देंहटाएं
  11. आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
    भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।

    ... बहुत खूबसूरत गजल... हरेक शेर लाजवाब...

    उत्तर देंहटाएं
  12. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    गज़ल दिल को छू गई.

    उत्तर देंहटाएं
  13. चन्द्र भूषण जी नमस्कार, यह तो तेरी राह का एक पड़ाव----------- --बहुत खूब लिखा है आपने मेरे ब्लाग पर आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
    भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।
    bahut sunder ...

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह,बहुत उम्दा लिखा है.

    उत्तर देंहटाएं
  16. आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
    भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।
    .ati sundar!!!

    उत्तर देंहटाएं
  17. चिकनी राहें बुलाती ही हैं...
    बढ़िया गज़ल...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  18. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है कल शनिवार (12-11-2011)को नयी-पुरानी हलचल पर .....कृपया अवश्य पधारें और समय निकल कर अपने अमूल्य विचारों से हमें अवगत कराएँ.धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  19. चिकनी राह बुलाए गाफिल! अपनी सिम्त फिसलने को।
    ..वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  20. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    बहुत बढि़या।
    चलते रहना ही जि़ंदगी है।

    उत्तर देंहटाएं
  21. भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।
    लगे तो हम सब हैं.

    चिकनी राहे कुछ ज्यादा ही चमकती हैं.

    बढिया गज़ल .

    उत्तर देंहटाएं
  22. सकारात्मक व सार्थक अभिव्यक्ति ।
    बहुत अच्छे भाव !

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत कुछ पठनीय है यहाँ आपके ब्लॉग पर-. लगता है इस अंजुमन में आना होगा बार बार.। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  24. हमेशा की तरह आज भी बेहतरीन सुंदर गजल क्या बात है..बधाई
    मेरे पोस्ट पर आइये स्वागत है ....

    उत्तर देंहटाएं
  25. बेहतरीन सुंदर गजल क्या बात है

    उत्तर देंहटाएं
  26. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    बहुत खूब, गाफिल जी, बहुत खूब।
    बढि़या ग़ज़ल है।

    उत्तर देंहटाएं
  27. समय पर चोट करती खूबसूरत ग़ज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  28. गिरता है चलने वाला ही, वो चलना ही फ़ित्रत है,
    चिकनी राह बुलाए गाफिल! अपनी सिम्त फिसलने को।
    बेहतरीन ग़ज़ल गाफ़िल साहब की हर अश आर अलग धार लिए पतवार लिए अर्थों की .

    उत्तर देंहटाएं
  29. बेहतरीन ग़ज़ल गाफ़िल साहब की हर अश आर अलग धार लिए पतवार लिए अर्थों की .

    उत्तर देंहटाएं
  30. चाँद रहा है मिसाल हरदम रुखे-माहपारावों का,
    हम हैं के आमादा उसको पावों तले कुचलने को।
    सुन्दर भाव रचना मन भाई इससे पहली रचना भी मन को बंधती है दोनों रचनाएं अति सुन्दर .

    उत्तर देंहटाएं
  31. सुन्दर भाव रचना मन भाई इससे पहली रचना भी मन को बांधती है बींधती भी है . दोनों रचनाएं अति सुन्दर .

    उत्तर देंहटाएं
  32. क्या बात है । आपेक पोस्ट ने बहुत ही भाव विभोर कर दिया । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है ।

    उत्तर देंहटाएं
  33. kya baat hai sir

    आता भी है जाता भी है दुनिया का हर एक बसर,
    भरम है तेरा लगा हुआ जो यह दस्तूर बदलने को।

    उत्तर देंहटाएं
  34. यह तो तेरी रह का एक पड़ाव है यार! नहीं मंजिल,
    हुआ बहुत आराम, हो अब तैयार भी आगे चलने को।

    kya baat hai sir..har sher misaal hai...bahut bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं
  35. अति सुन्दर प्रस्तुति,
    मन भावन गज़ल।
    धन्यवाद
    आनन्द विश्वास

    उत्तर देंहटाएं