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रविवार, दिसंबर 25, 2011

कस्म गोया तेरी खायी न गयी

दिल से तस्वीर मिटायी न गयी।
याद तेरी थी भुलायी न गयी।।

ज़ीनते-गुफ़्तगू हो जाती बस
बात बाक़द्र चलायी न गयी।

खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
वह खुशी हमसे तो पायी न गयी।

खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
कस्म गोया तेरी खायी न गयी।

नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।

बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।
(ज़ीनते-गुफ़्तगू=गफ़्तगू की रौनक़, बादे-ज़िन्दाँ=ज़ेल की हवा, नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना=प्रेमिका की उपेक्षा की आग के हवाले)
                                                               -ग़ाफ़िल 

69 टिप्‍पणियां:

  1. AAP KI AMANAT ME JAMANAT HI NAHI

    BAHUT KHOOB BAHUT KHOOB ........./

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  2. aapke sheron ne sama aisa bandha lajab
    chahker bhi tippadi badi likhai na gayi
    behtarin..नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।..

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  3. बहुत सुंदर गजल बेहतरीन,.....

    मेरे नए पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे

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  4. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी।
    बहुत खूबसूरत गजल

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  5. पूछा कई बार चारागर ने मगर
    चोट ऐसी थी कि दिखायी न गई
    वाह!!!! गाफिल जी, क्या खूब गज़ल है
    खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।
    भई, वाह !!!!

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  6. सुन्दर.... भावो का बहुत अच्छा प्रदर्शन

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  7. भावपूर्ण रचना |
    गजल अच्छी लगी |
    आशा

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  8. कोई बात नहीं ग़ाफ़िल साहब,ये नहीं,वो सही। वो नहीं,कोई और सही!

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  9. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी।

    खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।
    ...बहुत ख़ूब..उम्दा रचना..

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  10. नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।

    बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।

    वाह गाफिल जी , एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिए ....आभार | मै तो सिर्फ इतना कहना चाहूँगा -

    गाफिल ग़ज़ल की शक्ल में क्या खूब तजुर्बा है |
    जज्बातेजिगर गुफ्तगुं , तुझसे तो छिपाई ना गयी ||

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  11. khojta rah gaya ti umra jise
    woh khushi hum se paie na gaee
    Badh ka paloo ko tham lene ki
    rasm gaphil se nibhaie na gaee

    KAMAL KA LIKHA HAI -BADHAIE

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  12. बहुत खूब.....
    बेहतरीन ग़ज़ल...

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  13. वाह क्या बात है. दर्द में सनी एक जबरदस्त ग़ज़ल.

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  14. खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।.....वाह क्या बात है.....

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  15. खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी। Bahut Khoob Behtarin rachna.

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  16. नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।

    उत्तर देंहटाएं
  17. नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।
    बहुत खूब शबाब आरहा है शायर की शायरी में .

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  18. आपका अंदाजेबयाँ निराला है सर जी

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  19. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी

    ...बहुत खूब! हरेक शेर बहुत उम्दा...

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  20. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी


    बाह ..मन कोछूती सुन्दर रचना

    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

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  21. ak khoob soorat ghazal pr punh abhar .... mere nye post pr swagat hai.

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  22. बहुत सुंदर....नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

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  23. वाह ...बहुत खूब


    नववर्ष की अनंत शुभकामनाओं के साथ बधाई ।

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  24. आपका पोस्ट बहुत ही अच्छा लगा .। मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाए ।

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  25. सुंदर अभिव्यक्ति,.....
    नया साल सुखद एवं मंगलमय हो,....

    मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

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  26. नववर्ष की शुभकामनाएँ लीजिए।

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  27. बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।
    बहुत ख़ूब! क्या बात कही है!!

    आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  28. बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म गाफ़िल से निभायी न गयी

    बेहतरीन, बेहतरीन।
    शुभ नववर्ष।

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  29. नए वर्ष की हार्दिक बधाई.

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  30. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी।
    नव वर्ष मुबारक .हर सुबह हर शाम मुबारक .

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  31. खोजता रह गया ता’उम्र जिसे,
    वह खुशी हमसे तो पायी न गयी।बहुत उम्दा गाफ़िल जी .......

    उत्तर देंहटाएं
  32. आप को सपरिवार नव वर्ष 2012 की ढेरों शुभकामनाएं.

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  33. umda gazal..
    नव वर्ष मंगलमय हो !
    बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ....

    उत्तर देंहटाएं
  34. आपका पेस्ट अच्छा लगा । मरे अगले पोस्ट "जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपका बेसव्री से इंतजार रहेगा । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  35. गोया आप की इस खुबसूरत ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयां. यह नया साल आप की ऐसी कई खुबसूरत ग़ज़लों वाला साल हो और आप दिन-ब-दिन ज़्यादा से ज़्यादा खुशहाल हों. कृष्ण गोपाल सिन्हा,लखनऊ.

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  36. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

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  37. खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।

    वाह ! ये शेर पढ़ कर तो ग़ालिब का शेर याद आ गया

    ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वरना
    क्या कसम है तेरे मिलने की, के खा भी न सकूँ

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  38. बेहतरीन गजल।
    हर शेर लाजवाब।

    उत्तर देंहटाएं
  39. बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।
    बेहतरीन प्रस्तुति सारे शैर काबिले दाद .शुक्रिया आपकी ब्लोगिया दस्तक का .

    उत्तर देंहटाएं
  40. बहुत ही खूबसूरत गज़ल गापिल साहब, एक एक शेर सुंदर है ।

    उत्तर देंहटाएं
  41. बहुत ही खूबसूरत गज़ल गापिल साहब, एक एक शेर सुंदर है ।

    उत्तर देंहटाएं
  42. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  43. sir
    kya kahu ya likhun------
    bas yun samjhiye ki har sher ko do -do bar padhti gai.
    bahut bahut hi umda------
    poonam

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  44. बहुत ही सार्थक व सटीक लेखन| मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  45. आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२६) मैं शामिल की गई है /आप मंच पर आइये और अपने अनमोल सन्देश देकर हमारा उत्साह बढाइये /आप हिंदी की सेवा इसी मेहनत और लगन से करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक है
    http://www.hbfint.blogspot.com/2012/01/26-dargah-shaikh-saleem-chishti.html

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  46. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल है |
    मेरे भी ब्लॉग में पधारें |
    मेरी कविता

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  47. कस्म गोया तेरी खायी न गयी।

    नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।

    बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।

    हर एक शेर शानदार हैं
    वाह बहुत खूब.. उम्दा बधाई स्वीकार करें

    मैं आपको मेरे ब्लॉग पर सादर आमन्त्रित करता हूँ.....

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  48. //ज़ीनते-गुफ़्तगू हो जाती बस
    बात बाक़द्र चलायी न गयी।

    खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।

    नज़्रे-आतिशे-तग़ाफ़ुले-जाना
    दिल की दुनिया थी, बचायी न गयी।//

    lajawaab ghazal sir.. lajawaab...
    mazaa aa gaya..

    kabhi waqt mile to mere blog par bhi aaiyega.. ummeed karta hun niraash nahi karunga..
    palchhin-aditya.blogspot.com

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  49. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    गणतन्त्रदिवस की पूर्ववेला पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  50. बहूत सुंदर
    बेहतरीन गजल

    उत्तर देंहटाएं
  51. खा लिया मैंने बादे-ज़िन्दाँ भी,
    कस्म गोया तेरी खायी न गयी।

    वाह...क्या अन्दाज़ है!

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  52. बढ़के पल्लू को थाम लेने की,
    रस्म ग़ाफ़िल से निभायी न गयी।।
    Beautiful !

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