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शनिवार, नवंबर 22, 2014

ऐ सुब्ह सबा तेरी अगर मेरे दर आए

ऐ सुब्ह सबा तेरी अगर मेरे दर आए
जाना के दरीचों से गुज़र कर इधर आए

दोस्तो! आज की ख़ुशगवार सुब आप सबको बहुत-बहुत मुबारक हो

-‘ग़ाफ़िल’

1 टिप्पणी:

  1. सुंदरम मनोहरं। सदैव की तरह सशक्त स्वर। बहुत खूब कहा है फुटकर में होलसेल का मज़ा।

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