Saturday, March 15, 2014

जेब भर खाली होगी

यह शहरे-ग़ाफ़िल है अदा भी निराली होगी
वक़्ते-इश्तक़बाल हर ज़ुबान पर गाली होगी

रुख़े-ख़ुशामदी ही खिलखिलाएगा अक्सर
और तो ठीक है पर बात ही जाली होगी

होगी होली भी और हीलाहवाली होगी
भरी दूकान होगी जेब भर खाली होगी

जिसकी दरकार जहां होगा दरकिनार वही
पुश्त में बीवी होगी रू-ब-रू साली होगी

रोज़ होगा सियाह और शब उजाली होगी
दिखेगा सब्ज़ मगर झमकती लाली होगी

नहीं मिसाल और होगा अहले दुनिया में
के क़ैस गोरा होगा लैला ही काली होगी

-‘ग़ाफ़िल’

11 comments:

  1. sir aapse phir kehna hai ki aapko jo shabd bahut aasan lagte hain mere liye tough hain... aap shabdo ke arth jarur devein taki ghazalon ke lutf ke sath udru seekhnein ka bhi mauka hame uplabdh ho sake

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  2. वाह! क्या शहर है...लाज़वाब

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  3. आप सभी महानुभावों का तहेदिल से शुक्रिया जो आप सब ने हमारी रचना दिलोदिमाग से पढ़ी और उसपर वाज़िब कमेंट्स किए। डॉ0 आशुतोष जी से मुआफ़ी चाहॅँगा, उनकी शिक़ायत दूर कर दी गई हे। आइन्दा यह शिक़ायत उन्हें नहीं मिलेगी।
    -ग़ाफ़िल

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  4. शानदार !! आज के परिवेश पर बढ़िया कटाछ है. ये हाल सिर्फ शहरे गाफिल का ही नहीं सबके शहर का है. लाजवाब रचना.

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  5. ग़ाफ़िल सर!
    वक्ते इस्तकबाल हर जुबान पर गाली होगी, आपकी भविष्यवाणी वर्तमान में भी फलफूल रही है। बहुत अच्छा प्रयास, धन्यवाद।

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  6. सभी शेर सच बयान करते हुए...बहुत ख़ूब

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  7. यह शहरे-ग़ाफ़िल है, अदा भी निराली होगी,
    वक़्ते-इस्तक़बाल, हर जुबान पे गाली होगी।


    -आप तो हमारे शहर के लगते हैं. :)

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  8. बेहतरीन गजल गाफिल साहब ||
    बधाई ||
    पुश्त में बीवी और रू-ब-रू साली होगी॥
    ये क्या साहब दुखती रग पर दबाव बढ़ा दिया ||

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