मान जा ऐ दिल
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
तुझको जीना है
जख़्म सीना है
रात काली है
और दिवाली है
लुट चुकी अस्मत
मिट चुकी क़िस्मत
हुस्न है फन्दा
फंस गया बन्दा
कहता ये ग़ाफ़िल
ना भी बन क़ातिल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
मान जा ऐ दिल
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
कमेंट बाई फ़ेसबुक आई.डी.
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
तुझको जीना है
जख़्म सीना है
रात काली है
और दिवाली है
लुट चुकी अस्मत
मिट चुकी क़िस्मत
हुस्न है फन्दा
फंस गया बन्दा
कहता ये ग़ाफ़िल
ना भी बन क़ातिल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
मान जा ऐ दिल
है बड़ी मुश्क़िल
फिर भी नफ़रत सीख ले!
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