तक़्दीर है के चलता हूँ ग़ुरबत के रास्ते
भाते हैं गो मुझे भी नफ़ासत के रास्ते
मेरे लिए ही बन्द हुई जा रही है क्यूँ
वह क़ू जहाँ से जाते हैं किस्मत के रास्ते
तुह्मत लगाई जाती यूँ आवारगी की क्या
चल देता गर कभी मैं ज़ुरूरत के रास्ते
पा जाऊँगा ही तुझको हो ग़ाफ़िल यक़ीं अगर
तो क्यूँ क़ुबूल कर न लूँ ज़ुर्रत के रास्ते
-‘ग़ाफ़िल’
भाते हैं गो मुझे भी नफ़ासत के रास्ते
मेरे लिए ही बन्द हुई जा रही है क्यूँ
वह क़ू जहाँ से जाते हैं किस्मत के रास्ते
तुह्मत लगाई जाती यूँ आवारगी की क्या
चल देता गर कभी मैं ज़ुरूरत के रास्ते
पा जाऊँगा ही तुझको हो ग़ाफ़िल यक़ीं अगर
तो क्यूँ क़ुबूल कर न लूँ ज़ुर्रत के रास्ते
-‘ग़ाफ़िल’
