Thursday, March 15, 2018

जब मिला तू जामे से बाहर मिला

तूने चाहा था जो वो जी भर मिला
तू ही कह क्या तू भी मुझको पर मिला

आज तक फुटपाथ पर था जी को अब
तू दिखा लगता है सुन्दर घर मिला

रब्त क़ायम हो न पाया गो के तू
आते जाते राह में अक़्सर मिला

शह्रे जाना में गया मैं जब कभी
हर बशर क्यूँ मुझको दीदःवर मिला

कैसे कह पाता मैं ग़ाफ़िल हाले दिल
जब मिला तू जामे से बाहर मिला

-‘ग़ाफ़िल’

Monday, March 12, 2018

मैं अपने ज़िस्म के कच्चे मक़ान से भी गया

रही जो थोड़ी अब उस आन बान से भी गया
मैं तेरे इश्क़ में धरमो ईमान से भी गया

मक़ाम ख़ुल्द था पर हाय री मेरी किस्मत
मैं अपने ज़िस्म के कच्चे मक़ान से भी गया

-‘ग़ाफ़िल’