तूने चाहा था जो वो जी भर मिला
तू ही कह क्या तू भी मुझको पर मिला
आज तक फुटपाथ पर था जी को अब
तू दिखा लगता है सुन्दर घर मिला
रब्त क़ायम हो न पाया गो के तू
आते जाते राह में अक़्सर मिला
शह्रे जाना में गया मैं जब कभी
हर बशर क्यूँ मुझको दीदःवर मिला
कैसे कह पाता मैं ग़ाफ़िल हाले दिल
जब मिला तू जामे से बाहर मिला
-‘ग़ाफ़िल’
तू ही कह क्या तू भी मुझको पर मिला
आज तक फुटपाथ पर था जी को अब
तू दिखा लगता है सुन्दर घर मिला
रब्त क़ायम हो न पाया गो के तू
आते जाते राह में अक़्सर मिला
शह्रे जाना में गया मैं जब कभी
हर बशर क्यूँ मुझको दीदःवर मिला
कैसे कह पाता मैं ग़ाफ़िल हाले दिल
जब मिला तू जामे से बाहर मिला
-‘ग़ाफ़िल’