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ग़ाफ़िल

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Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Monday, December 01, 2014

चश्मे-साक़ी में जो साग़र हैं तलाशा करते

ऐसे कुछ हैं के जो पत्थर हैं तलाशा करते
वह जो मिल जाय तो इक सर हैं तलाशा करते

हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर
बदनुमा दाग़ वो अक्सर हैं तलाशा करते

इल्म तो है के वो हम जैसों को मिलते हैं कहाँ
हम भी पागल से उन्‍हें पर हैं तलाशा करते

ताल सुर बह्र से जिनका है न लेना देना
मंच ऊँचा, वे सुख़नवर हैं तलाशा करते

यार ग़ाफ़िल! क्या सभी रिंद हुए शाइर अब
चश्मे-साक़ी में जो साग़र हैं तलाशा करते

-‘ग़ाफ़िल’

कमेंट बाई फ़ेसबुक आई.डी.

56 comments:

  1. देख ग़ाफ़िल इन्हें हैं ये भी सरपरस्ते वतन,
    आह में कैसे मुक़द्दर तलाशते हैं ये।।

    वाह !!! क्या बात है,
    बहुत खुबशुरत गजल,...गाफिल साहब,,,,,,

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  2. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
    खूबसूरत गज़ल ...!!
    शुभकामनायें ..!

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  3. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।

    साफ़गोई से फ़ित्रतन न वास्ता इनका,
    मंच ऊँचा व पा ज़बर तलाशते हैं ये।

    बहुत खूबसूरत गजल

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  4. बहुत सुन्दर गजल

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  5. ज़बरदस्त है ग़ज़ल.

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।

    ....बहुत खूब ! बेहतरीन गज़ल..

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    Replies
    1. बहुत देर कर दी प्रभु आते आते -
      स्वागत है -
      कई हफ़्तों बाद सुन्दर गजल के दर्शन हुवे |
      आभार आपका ||

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  8. हर बार की तरह बहुत खूबसूरत गज़ल |
    अर्ज किया है ........
    अपने गिरेबान में झाँकने कि उन्हें फुर्सत नहीं मिलती |
    फिर भी दूसरे के घर का चक्कर लगा ही आते है वो |

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  9. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
    वाह जबरदस्त काबिले तारीफ ग़ज़ल सभी शेर बढ़िया हैं पर इस विशेष के लिए दाद कबूल कीजिये

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी, हार्दिक बधाई

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  11. वाह बहुत ही गहरे चंद्रभूषण जी । क्या बात है बहुत ही उम्दा जी बहुत ही उम्दा । सब की सब कमाल की हैं

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  12. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
    बहुत खूब
    सुन्दर गज़ल.

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  13. देख ग़ाफ़िल! हैं मह्वेख़ाब सरपरस्ते वतन,
    नज़रे मज्बूर में साग़र तलाशते हैं ये...

    excellent creation.

    .

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  14. बहुत ही अच्छी रचना है...

    साफ़गोई से फ़ित्रतन न वास्ता इनका,
    मंच ऊँचा व पा ज़बर तलाशते हैं ये।

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  15. बारहा दर-ब-दर पत्थर तलाशते हैं ये।
    वह जो मिल जाय तो इक सर तलाशते हैं ये।।

    क्या बात है गाफिल साहब - मज़ा आ गया

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  16. इनको फ़ुर्सत है कहाँ मिह्रबान होने की,
    ख़ुद ज़ुरूरत पे मिह्रवर तलाशते हैं ये।

    wah bahut khoob .......badhai sir

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  17. बधाई इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए...हर शेर काबिलेगौर है..यह शेर तो कमाल का है.
    हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये

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  18. गाफिल साहब ज़बरदस्त ग़ज़ल
    आपको पढना वाकई सुखद अनुभव है

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  19. देख ग़ाफ़िल! हैं मह्वेख़ाब सरपरस्ते वतन,
    नज़रे मज्बूर में साग़र तलाशते हैं ये।।
    नज्म ऐसी जो खुद्दारी के साथ हालाते -बाख्याल वो मिशाले- जिक्र भी ......साफगोई सिफत की हक़दार भी पैरोकार भी ......मुबारका मिश्र जी /

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  20. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
    बहुत उम्दा , जबरजस्त

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  21. बेहतरीन ग़ज़ल..

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  22. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है ...... हार्दिक बधाई

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  23. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
    ये हमारी फितरत हो गई है कि पाक साफ़ चीज़ में भी दाग़ तलाशते रहते हैं।

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  24. पत्थर तो सर ही तलाशेंगे
    बहुत सुन्दर गज़ल

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  25. कल 20/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  26. वाह खूबसूरत शब्दों से सजी गज़ल ...हर शेर लाजवाब

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  27. साफ़गोई से फ़ित्रतन न वास्ता इनका,
    मंच ऊँचा व पा ज़बर तलाशते हैं ये।
    आके ब्लॉग पे आपके बार बार ,
    वोकेबुलरी सुधारतें हैं हम .
    कृपया 'सरापा 'भी बतलाएं .

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  28. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।


    वाह ,,,, बहुत खूबसूरत बेहतरीन गजल ,,अच्छी प्रस्तुति

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: किताबें,कुछ कहना चाहती है,....

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  29. is ghaza ko to main kai dino se padh raha hoon ..per mera comment mujhe nahi mila..phir padha to parivartan laga..aapkee ghazlon kee jitni taarif kee jaaye kam hai..baise mere liye to ye pathshala hai..sadar badhayee ke sath

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  30. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।

    खूबसूरत... उम्दा अशआर...
    सादर बधाई।

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  31. वाह...बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति...

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  32. अद्भुत ग़ज़ल है ,जितनी भी तारीफ़ करूँ कम है

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  33. बारहा दर-ब-दर पत्थर तलाशते हैं ये।
    वह जो मिल जाय तो इक सर तलाशते हैं ये।।

    लाजवाब मत्अला।
    हर शेर अपने आप में मुकम्मल।

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  34. बदख़याली से सरापा हैं ख़ुद सियाह बदन,
    चाँद के मिस्ल हमसफ़र तलाशते हैं ये।अगली ग़ज़ल मुद्दत से इंतजारी में है ,बढ़िया प्रस्तुति ,शानदार .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 27 मई 2012
    ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह
    .
    ram ram bhai
    को सूली पर
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    तथा यहाँ भी -
    चालीस साल बाद उसे इल्म हुआ वह औरत है

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in

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  35. चर्चा मंच ज़मात में बिठाने के लिए शुक्रिया .

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  36. बारहा दर-ब-दर पत्थर तलाशते हैं ये।
    वह जो मिल जाय तो इक सर तलाशते हैं ये।।

    हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।

    बहुत खूबसूरत गजल..बहुत सुन्दर प्रस्तुति है

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  37. हैं ब्लॉग पर भी इन दिनों,पत्थर लिए कई
    इसका करूं कि उसका,बस सर तलाशते हैं ये!

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  38. बारहा दर-ब-दर पत्थर तलाशते हैं ये।
    वह जो मिल जाय तो इक सर तलाशते हैं ये।।व्यंग्य प्रधान पोस्ट ,शुक्रिया चर्चा प्रवेश के लिए .कृपया यहाँ भी पधारें -
    .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 10 जून 2012
    टूटने की कगार पर पहुँच रहें हैं पृथ्वी के पर्यावरण औ र पारि तंत्र प्रणालियाँ Environment is at tipping point , warns UN report/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,NEW DELHI,JUNE 8 ,2012,१९
    http://veerubhai1947.blogspot

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  39. हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
    बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।

    wah sir lajbab .......sadar abhar bhi .

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  40. देख ग़ाफ़िल! हैं मह्वेख़ाब इस क़दर मयकश,
    चश्मे-साक़ी में भी साग़र तलाशते हैं ये।।

    bahut sundar..

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  41. बहुत बढ़िया
    बहुत ही बेहतरीन गजल..
    :-)

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  42. बदख़याली से सरापा हैं ख़ुद सियाह बदन,
    चाँद के मिस्ल हमसफ़र तलाशते हैं वो।

    क्या बात है गाफिल साहब बहोत खूब ।

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  43. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

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  44. http://merisoch15.blogspot.in/

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  45. गाफिल साहब अब समझ आया गजल का मतलब जब आपने मानी लिख दिए हर लफ्ज़ के खोलके शुक्रिया .

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  46. wahhhhh...Behad Umda
    साफ़गोई से फ़ित्रतन न वास्ता जिनका,
    मंच ऊँचा व पा ज़बर तलाशते हैं वो।
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  47. शुक्रिया आपकी सद्य टिपण्णी का जो सदैव ही हमारी धरोहर हैं .

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  48. मकर संक्रान्ति की बहुत बहुत बधाई.....

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  49. जिनको फ़ुर्सत है नहीं मिह्रबान होने की,
    ख़ुद ज़ुरूरत पे मिह्रवर तलाशते हैं वो।
    बहुत खूब ...

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