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रविवार, जुलाई 03, 2016

ज़रा सोचता मुस्कुराने से पहले

वो आए किसी भी बहाने से पहले
उसे देखना है ठिकाने से पहले

बताओ भला इश्क़ की भी इजाज़त
अरे यार क्या लूँ ज़माने से पहले

चलाया वो तीरे नज़र और लगा भी
मगर हिचकिचाया चलाने से पहले

मेरी धडकनों के भी बावत सितमगर
ज़रा सोचता मुस्कुराने से पहले

कहाँ हौसला था उठाने का परबत
हसीनों के नख़रे उठाने से पहले

ज़रा झाँकना आईने में भी ग़ाफ़िल
मुझे इश्क़ में आज़माने से पहले

-‘ग़ाफ़िल’

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 04 जुलाई 2016 को लिंक की गई है............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (04-07-2016) को "गूगल आपके बारे में जानता है क्या?" (चर्चा अंक-2393) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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