फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Tuesday, July 12, 2016

हुआ एक अर्सा गए भी हँसी को

दिए क्या भला आज तक ज़िन्दगी को
लगाए नहीं तुम गले गर किसी को

नहीं रोक पाओगे ख़ुद को जो मेरी
तसव्वुर में लाओगे तश्नालबी को

दहल जाएगा दिल तुम्हारा भी बेशक
निहारोगे जब भी मेरी बेबसी को

न डूबा तो क्या लाश मुझको कहोगे
मैं हूँ तैरकर पार करता नदी को

किसी ने किया आज इज़्हारे उल्फ़त
कहूँ तो कहूँ क्या मैं इस दिल्लगी को

अरे यार ग़ाफ़िल न लौटेगी फिर क्या
हुआ एक अर्सा गए भी हँसी को

-‘ग़ाफ़िल’

No comments:

Post a Comment