फ़ेसबुक पर अनुसरण करें-

ग़ाफ़िल

My photo
Babhnan, Gonda, Uttar Pradesh, India

Sunday, July 17, 2016

आवारा कर दिया शह्र की गलियों ने

कहता हूँ सावन की स्याह घटाओं ने
उलझाया पर मुझको तेरी ज़ुल्फ़ों ने

शह्र की गलियों में है जो अफ़रातफ़री
आज शैर की ठानी है दिलवालों ने

सकते में है बाग़बान करता भी क्या
साथ चमन के गद्दारी की फूलों ने

फ़ित्रत से मैं रहा घुमक्कड़ मुझे मगर
आवारा कर दिया शह्र की गलियों ने

आज बन गया जी का भर्ता बेमतलब
ऐसी ऐसी ग़ज़ल सुनाई लोगों ने

चल भी लेता बिना सहारे मैं ग़ाफ़िल
मगर बिगाड़ी आदत तेरे कन्धों ने

-‘ग़ाफ़िल’

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-07-2016) को "सच्ची समाजसेवा" (चर्चा अंक-2407) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete