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सोमवार, जुलाई 25, 2016

बता फिर तेरी क़ीमत और क्या है

ख़रा तो हूँ अदावत और क्या है
तुझे मुझसे शिक़ायत और क्या है

है मेरे सर पे तेरा दस्त या रब!
भला मेरे लिए छत और क्या है

कहाँ अब तुझको मेरा ग़म सताए
न है यह तो फ़ज़ीहत और क्या है

चुकाया था तो पर ज़िद पे है अब तू
बता फिर तेरी क़ीमत और क्या है

चले हर सू से सर पे संग फिर यह
न उल्फ़त है तो उल्फ़त और क्या है

ग़नीमत है के सर तो है सलामत
इस उल्फ़त में सलामत और क्या है

इनायत है तेरी ऐ मेरे हमदम
ज़ियादा इससे राहत और क्या है

परीशाँ कर रहा मुझको तू ग़ाफ़िल
अलावा इसके आदत और क्या है

-‘ग़ाफ़िल’

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